कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वाराणसी में पार्टी के राष्ट्रव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) प्रदर्शनकारियों पर ‘योगी-मोदी की ट्रबल इंजन’ सरकार ने पुलिस को ‘क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज’ करने का आदेश दिया.

नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार (11 जनवरी) को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में ‘योगी-मोदी की ट्रबल इंजन’ सरकार ने पुलिस को वाराणसी में पार्टी के राष्ट्रव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) प्रदर्शनकारियों पर ‘क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज’ करने का आदेश दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक, इस संबंध में कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक वीडियो क्लिप साझा की, जिसमें पुलिस को कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को धक्का देते और उनके खिलाफ बल प्रयोग करते हुए देखा जा सकता है.
इस संबंध में जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मेरे युवा सहयोगी वरुण चौधरी के नेतृत्व में छात्रों ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ मार्च निकाला.
उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा, ‘यह एक पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक अधिकारों के तहत किया गया लोकतांत्रिक प्रदर्शन था, लेकिन योगी मोदी की ट्रबल-इंजन सरकार को सवालों से इतनी घबराहट है कि उसने पुलिस के ज़रिये बेरहमी से लाठीचार्ज करा दिया.’
मालूम हो कि एनएसयूआई कांग्रेस का छात्र संगठन है. इस घटना को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी भाजपा पर निशाना साधा.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मनरेगा को खत्म करके करोड़ों मजदूरों से रोजगार का अधिकार छीनने के खिलाफ वाराणसी में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे एनएसयूआई के छात्रों पर बर्बरतापूर्ण बलप्रयोग एवं गिरफ्तारी अत्यंत निंदनीय है. हम कड़े शब्दों में इस कायरतापूर्ण कार्रवाई की निंदा करते हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘नरेंद्र मोदी सरकार करोड़ों मजदूरों से रोजगार का कानूनी अधिकार छीन रही है और आवाज उठाने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है. कांग्रेस पार्टी का हर एक कार्यकर्ता इस अन्याय, अत्याचार और दमन के खिलाफ डटकर खड़ा है.’
उल्लेखनीय है कि शनिवार (10 जनवरी) को कांग्रेस ने यूपीए सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को रद्द करने के विरोध में अपना 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान – मनरेगा बचाओ संग्राम – शुरू किया है. इस अभियान के तहत हर जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं.
विपक्ष का आंदोलन
विपक्षी दलों का आंदोलन, जिसमें विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में बहाल करने, काम के अधिकार और पंचायतों के अधिकार को बहाल करने की मांग की जा रही है, 25 फरवरी तक जारी रहेगा.
इसके तहत शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं, जिनमें संसद के शीतकालीन सत्र में मनरेगा को निरस्त करके उसके स्थान पर वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू किए जाने के तरीके पर प्रकाश डाला गया.
इसके बाद रविवार (11 जनवरी) को जिला मुख्यालयों में एक दिन का उपवास और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया गया. 12 से 29 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों में चौपाल और जन संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसके बाद 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे ताकि काम के अधिकार की मांग को लेकर विरोध जताया जा सके.
इस संबंध में पार्टी ने कहा है कि 7 से 15 फरवरी तक विधानसभाओं के राज्य स्तरीय घेराव आयोजित किए जाएंगे, जबकि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के समापन से पहले 16 से 25 फरवरी के बीच चार बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी.
कांग्रेस वीबी-जी राम जी कानून को पूरी तरह वापस लेने और मनरेगा को बहाल करने की मांग कर रही है.
पार्टी का कहना है कि निरस्त किए गए इन काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन दिल्ली केंद्रित था, जबकि मनरेगा बचाओ संग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला और राज्य केंद्रित होगा.
गौरतलब है कि वीबी-जी राम जी विधेयक को लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद 18 दिसंबर, 2025 को राज्यसभा में विरोध प्रदर्शनों के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था.
वहीं, इस विधेयक को 21 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी मंजूरी दे दी थी, जिससे अब यह एक अधिनियम बन गया है, जिसमें प्रत्येक ग्रामीण परिवार को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने की योजना है.