पाकिस्तान की जेल में बंद गुजराती मछुआरे की मौत, रिहाई और स्वदेश वापसी में देरी पर फिर उठे सवाल

पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई में देरी के बीच गुजरात के एक मछुआरे की 16 जनवरी को मौत हो गई. उसकी सज़ा 2022 में पूरी हो चुकी थी. एक्टिविस्ट और पत्रकार जतिन देसाई ने इसे मानवीय संकट बताते हुए भारत-पाक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.

नई दिल्ली: पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय मछुआरों को रिहा कर स्वदेश भेजने की प्रक्रिया तेज़ करने की मांगों के बीच, उनमें से एक मछुआरे की 16 जनवरी को मौत हो गई.

बताया जा रहा है कि वह गुजरात के रहने वाले थे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, गुजराती मछुआरे की मौत की जानकारी रविवार को एक्टिविस्ट और पत्रकार जतिन देसाई ने दी. वे पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों के मामलों को लगातार उठाते रहे हैं. हालांकि, उन्होंने मृत मछुआरे का नाम नहीं बताया. बताया गया कि उनकी सज़ा साल 2022 में ही पूरी हो चुकी थी.

एक बयान में देसाई ने कहा:

मृत मछुआरे की सज़ा 2022 में पूरी हो गई थी. उनकी नागरिकता की पुष्टि भी हो चुकी थी. 2008 के कांसुलर एक्सेस से जुड़े द्विपक्षीय समझौते की धारा 5 में कहा गया है कि दोनों सरकारें नागरिकता की पुष्टि और सज़ा पूरी होने के एक महीने के भीतर व्यक्ति को रिहा कर वापस भेजने पर सहमत होंगी… लेकिन यह सब सिर्फ काग़ज़ों में है. मृत मछुआरे समेत जेल में बंद ज़्यादातर मछुआरे बहुत पहले अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं और उनकी नागरिकता भी पुष्टि हो चुकी है.

बताया ज्ञाभाई कि करीब 200 भारतीय मछुआरे पाकिस्तान के कराची स्थित मलीर जेल में बंद हैं. उन पर आरोप है कि वे अनजाने में पड़ोसी देश की समुद्री सीमा में प्रवेश कर गए थे. इनमें से ज़्यादातर मछुआरे गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दीव के हैं, जबकि 19 मछुआरे महाराष्ट्र से हैं.

देसाई ने कहा, ‘हर साल कराची की मलीर जेल में करीब 3-4 भारतीय मछुआरों की मौत हो जाती है… यह एक गंभीर मुद्दा है. जेल में बंद मछुआरों के परिवार उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं. मलीर जेल में कुछ मछुआरों की हालत ठीक नहीं है और उन्हें बेहतर इलाज की ज़रूरत है. वे अपने घर लौटने की उम्मीद खोते जा रहे हैं, और यह बेहद चिंताजनक है.’

देसाई ने मांग की है कि भारत और पाकिस्तान, गिरफ्तार मछुआरों के मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखें, क्योंकि वे अक्सर अनजाने में सीमा पार कर जाते हैं.

हाल ही में मछुआरा परिवारों की महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिला था. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया तेज़ करने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधिमंडल ने छह मांगें रखीं- मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी, तत्काल चिकित्सा सहायता और मानवीय आधार पर वापसी, संयुक्त न्यायिक समिति (जॉइंट ज्यूडिशियल कमेटी ऑन प्रिजनर्स) को फिर से सक्रिय करना, जिसकी आख़िरी बैठक अक्टूबर 2013 में हुई थी, ज़ब्त की गई नौकाओं की वापसी, और मछुआरा परिवारों के लिए राहत एवं सहायता.