ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी प्रेस ब्रीफिंग में शामिल भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया क़ुरैशी पर कथित तौर से विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री और भाजपा नेता विजय शाह को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा रतलाम में गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि बनाया गया है. कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे सेना और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा मामला बताया है.

नई दिल्ली: कर्नल सोफिया क़ुरैशी पर कथित तौर से विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता विजय शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इसकी वजह मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर जारी की गई सूची है, जिसमें विजय शाह का नाम मुख्य अतिथियों की सूची में शामिल है.
नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, विजय शाह रतलाम जिले में गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे.
मालूम हो कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के ख़िलाफ़ केस शुरू करने की मंज़ूरी में देरी पर सवाल उठाया था. तब मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बताया था कि अदालत द्वारा मई में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है और अब राज्य सरकार से अभियोजन की मंजूरी का इंतज़ार किया जा रहा है.
ताज़ा विवाद तब शुरू हुआ, जब ध्वजारोहण वाली लिस्ट में मंत्री विजय शाह के नाम को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई. सरकार के इस निर्णय का तीखा विरोध करते हुए कांग्रेस ने इसे सेना और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा मामला बताया है.
कांग्रेस का कहना है कि जिस मंत्री पर देश की बेटी और भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है, उसे गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामय राष्ट्रीय पर्व पर मंच देना गलत संदेश देता है.
कांग्रेस प्रदेश विवेक त्रिपाठी ने कहा कि देश की बेटी और भारतीय सेना की बहादुर अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक शब्द बोलने वाले मंत्री को रतलाम में तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. यह न सिर्फ सेना का अपमान है, बल्कि संविधान और राष्ट्रीय मूल्यों के भी खिलाफ है.
वहीं, भाजपा ने सरकार के फैसले का बचाव किया है. प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि सरकार ने मंत्री के बयान को गंभीरता से लिया और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया.
कर्नल को लेकर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
दरअसल, यह पूरा मामला बीते साल 13 मई को मध्य प्रदेश के महू में आयोजित एक कार्यक्रम में विजय शाह द्वारा दिए गए बयान से जुड़ा है. उस कार्यक्रम में शाह ने कहा था कि जिन्होंने ‘भारत की बेटियों को विधवा किया’, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘उनकी ही बिरादरी की बहन को भेजकर’ सबक सिखाया है. उन्होंने यह टिप्पणी तुरंत दोहराई भी थी.
हालांकि, शाह ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बयान कर्नल सोफिया कुरैशी की ओर इशारा करता है. कर्नल कुरैशी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ताओं में से एक रही हैं.
14 मई 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मंत्री की टिप्पणी ‘किसी और की नहीं बल्कि’ कर्नल कुरैशी की ओर ही संकेत करती है.
इसके बाद शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. उन पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने और ऐसे बयान देने का आरोप है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है.
इस कार्रवाई के बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इससे पहले 13 मई को उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को ‘किसी दूसरे संदर्भ में’ नहीं देखा जाना चाहिए.
शाह ने कहा था कि अगर उनकी टिप्पणी से ‘समाज और धर्म’ को ठेस पहुंची है तो वे ‘दस बार’ माफी मांगने को तैयार हैं. अगले दिन उन्होंने एक और बयान जारी कर कहा कि वे अपनी टिप्पणी को लेकर ‘शर्मिंदा और दुखी’ हैं और कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना की.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित कर दी थी. अदालत ने शाह की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था.
अगस्त में एसआईटी ने राज्य सरकार को मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया.