विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले ‘घुसपैठियों’ को लेकर चेताने की कड़ी में अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि अगर भाजपा तीसरी बार सत्ता में आई, तो हर अवैध प्रवासी को राज्य से बाहर निकाला जाएगा. इससे पहले उन्होंने बिहार और झारखंड चुनावों से पहले भी ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे को उठाया था.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (30 जनवरी) को असम में कथित घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा के चुनावी रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर पार्टी तीसरी बार राज्य में सत्ता में लौटती है, तो उसकी सरकार ‘घुसपैठियों’ को एक-एक करके खोजकर बाहर करेगी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमित शाह चुनावी अभियान की शुरूआत करते हुए कहा, ‘कांग्रेस ने वोट-बैंक की राजनीति के लिए असम में सत्ता में आने के लिए अवैध प्रवास को बढ़ावा दिया.’
शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज, असम की दूसरी राजधानी से मैं वादा करता हूं कि अगर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार तीसरी बार सत्ता में आती है, तो हर अवैध प्रवासी को चिह्नित कर असम से बाहर निकाला जाएगा.’
उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ ‘निर्णायक कदम’ उठाने का श्रेय राज्य सरकार को दिया और कहा कि अवैध प्रवासियों के कब्जे से 1.26 लाख हेक्टेयर जमीन खाली कराई जा चुकी है. उन्होंने शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने ‘अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं, जिन्होंने असम की जनसंख्या संरचना बदल दी है.’
शाह ने इस कथित अवैध प्रवास को बहुआयामी खतरा बताते हुए चेतावनी दी कि इससे जनसांख्यिकी बदली है, सुरक्षा से समझौता हुआ है, संसाधनों पर दबाव पड़ा है और यहां तक कि वन्यजीव भी खतरे में पड़े हैं. उन्होंने कहा, ‘अवैध प्रवासियों ने न केवल जनसंख्या का ग्राफ बदला है, बल्कि देश की सुरक्षा से भी समझौता किया है.’ उन्होंने जोड़ा, ‘अतिक्रमणकारियों ने श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि तक को नहीं छोड़ा और काजीरंगा के जंगलों में भी घुस गए तथा गैंडों की हत्या तक की.’
सीधे मतदाताओं से अपील करते हुए शाह ने कहा, ‘अगर आज असम के लोग अवैध प्रवासियों द्वारा हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव की प्रक्रिया को नहीं रोकते, तो आने वाले दिनों में राज्य को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. अवैध प्रवास को केवल भाजपा ही रोक सकती है, और कोई नहीं.’
उन्होंने इस मुद्दे के आर्थिक पहलू पर जोर देते हुए दावा किया कि अवैध प्रवासी वैध निवासियों के संसाधन छीन रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे संसाधन सीमित हैं और गरीबों के अधिकार अवैध प्रवासियों द्वारा छीने जा रहे हैं.’
पिछली सरकारों से भाजपा के रुख की तुलना करते हुए शाह ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी से पहले के प्रधानमंत्रियों के समय असम की सीमाएं अवैध प्रवास के लिए खुली थीं. मोदी सरकार के सत्ता में आने और भाजपा के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल तथा हिमंता बिस्वा शर्मा के सत्ता संभालने के बाद अवैध प्रवास को रोका गया.’
शाह ने साफ किया कि भले ही नई घुसपैठ पर लगाम लगाई गई हो, लेकिन अब ध्यान उन पर है जो पहले से मौजूद हैं. उन्होंने कहा, ‘जो पहले ही घुस आए हैं, उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा. भाजपा सरकार ऐसे अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालेगी.’
बाद में धेमाजी के कारेंग चापोरी में 10वें मिसिंग युवा महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने आगामी चुनावों में भाजपा का समर्थन करने की अपील की, ताकि ‘राज्य को घुसपैठ से मुक्त कराया जा सके.’
उन्होंने कहा, ‘घुसपैठियों की संख्या शून्य से बढ़कर 64 लाख हो गई और सात जिलों में घुसपैठिए बहुसंख्यक बन गए.’
शाह ने हिमंता बिस्वा शर्मा के समर्थन की अपील करते हुए कहा, ‘अगर आप असम में घुसपैठ रोकना चाहते हैं, तो तीसरी बार भाजपा सरकार चुनिए और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के हाथ मजबूत कीजिए. असम में भाजपा की दो राज्य सरकारों ने घुसपैठियों द्वारा किए गए अतिक्रमण से 1.26 लाख एकड़ जमीन मुक्त कराई है.’
मालूम हो कि पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा लगातार बांग्ला भाषी मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं. उनकी जिंदगी मुश्किल करने के लिए उन्हें परेशान करने की अपील की है. उनकी टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज हुई है.
अमित शाह चुनावों के दौरान अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाते रहे हैं
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले भी जिन-जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं वहां अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाते रहे हैं.
पिछले साल बिहार चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लगातार चुनावी रैलियों में बिहार की मतदाता सूचियों में कथित ‘अवैध प्रवासियों’ का मुद्दा उठाया था और एसआईआर के बाद विपक्षी कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ को ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ तक कह दिया था.
उससे पहले झारखंड विधानसभा चुनावों के दौरान भी भाजपा और अमित शाह ने कथित ‘घुसपैठिए’ का मुद्दा खड़ा किया था. झारखंड विधानसभा चुनाव का घोषणापत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा था कि ‘संथाल परगना और पूरे झारखंड के अंदर आदिवासियों की आबादी घट रही है, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बांग्लादेशी घुसपैठी झारखंड के अंदर आ रहे हैं. और ये हेमंत सोरेन की सरकार उन्हें नहीं रोक सकती है, इन्होंने हाईकोर्ट में हलफनामा डालकर कह दिया है कि हम रोकना नहीं चाहते हैं.’
शाह ने यह भी कहा था, ‘कांग्रेस और झामुमो घुसपैठियों को नहीं रोक सकते, वो इनकी वोट बैंक हैं. और घुसपैठिए हमारी आदिवासी माताओं और बहनों को फुसलाकर उनसे शादियां करते हैं और दहेज़ में उनसे इनकी जमीनें हड़प लेते हैं. भाजपा सत्ता में आने के बाद ऐसा सख्त कानून लाएगी, जिससे आदिवासियों की ज़मीन किसी घुसपैठिए के नाम ट्रांसफर नहीं होगी. और जो घुसपैठिए हमारी आदिवासी बच्चियों की ज़मीन हड़प लिए हैं, उन्हें भी वो ज़मीन वापस करनी पड़ेगी हम ऐसा क़ानून लाएंगे.’