सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब का हवाला देने से रोक दिया गया था. 4 फरवरी को उन्होंने सदन के बाहर किताब की प्रति दिखाते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री सदन में आएंगे तो वे यह किताब उन्हें सौंप देंगे.

नई दिल्ली: लोकसभा में उसका हवाला देने से रोके जाने के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार (4 फरवरी) को सदन के बाहर पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की आत्मकथा (संस्मरण) (जो प्रकाशन के बाद से सरकार की अनुमति के कारण की प्रति प्रदर्शित की. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री सदन में आएंगे तो वे यह किताब उन्हें सौंप देंगे.
राहुल गांधी ने कहा, ‘उन्होंने कहा कि यह किताब मौजूद ही नहीं है. भारत के हर युवा को पता होना चाहिए कि यह किताब मौजूद है. यह नरवणे की किताब है. इसमें उन्होंने लद्दाख का पूरा विवरण दिया है. मुझे बताया गया है कि मैं इस किताब से उद्धरण नहीं दे सकता.’
नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, किताब की सबसे अहम पंक्ति वह है, जो 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की गतिविधियों के दौरान प्रधानमंत्री ने नरवणे से कही थी: ‘जो उचित समझो वह करो.’
सोमवार को गांधी द्वारा संस्मरणों का ज़िक्र करने के बाद लोकसभा में सत्ता पक्ष ने हंगामा किया, जिसमें कथित तौर पर पूर्व सेना प्रमुख कहते हैं कि उन्हें ‘एक मुश्किल परिस्थिति में डाल दिया गया था’ – यानी 2020 में लद्दाख में चीनी कार्रवाई से निपटने की ज़िम्मेदारी अकेले उन पर थी.
कारवां पत्रिका के फरवरी अंक में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, नरवणे अपने संस्मरण में लिखते हैं कि चीनी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देने का फैसला पूरी तरह से उन पर छोड़ दिया गया था. गांधी ने इसी बात को दोहराते हुए कहा कि इससे उन्हें ‘पूरे सिस्टम द्वारा अकेला छोड़ दिया गया’ महसूस हुआ.
गौरतलब है कि सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में आपत्ति जताई थी और कहा था कि किसी अप्रकाशित किताब का सदन में हवाला नहीं दिया जा सकता. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए गांधी को कारवां के उस लेख से उद्धरण देने से रोक दिया, जिसमें किताब के अंश छपे हैं.
मंगलवार को गांधी ने सदन में कहा था कि वह लेख प्रामाणिक है.
‘जब थल सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने राजनाथ सिंह को फोन कर बताया कि चीनी टैंक हमारे इलाके में कैलाश रिज तक पहुंच गए हैं और पूछा कि ‘हमें क्या करना चाहिए?’, तो पहले राजनाथ सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने (नरवणे ने) जयशंकर, एनएसए और राजनाथ सिंह से पूछा, लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं मिला.
गांधी ने कहा, ‘फिर उन्होंने दोबारा राजनाथ सिंह को फोन किया. राजनाथ सिंह ने कहा कि वे ‘ऊपर’ से पूछेंगे. ‘ऊपर’ से स्थायी आदेश था कि अगर चीनी बल अंदर आते हैं तो बिना अनुमति के उन पर गोली नहीं चलानी है. नरवणे-जी और हमारी सेना उन टैंकों पर गोली चलाना चाहती थी क्योंकि वे हमारे इलाके में घुस आए थे. नरेंद्र मोदी जी ने संदेश दिया कि ‘जो उचित समझो वह करो’.’
गांधी का कहना है कि इससे यह दिखता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और नरवणे को पूरे सिस्टम ने अकेला छोड़ दिया: गांधी ने कहा, ‘इसका मतलब है कि नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई; उन्होंने सेना प्रमुख से कहा कि जो चाहो करो, यानी ‘मेरे बस की नहीं है.’
उन्होंने यह भी कहा कि नरवणे इस घटना के बारे में लिखते हैं कि उन्हें ‘सच में अकेला और पूरे सिस्टम द्वारा छोड़ा हुआ’ महसूस हुआ. राहुल गांधी ने कहा, ‘यही बात है, जिसे वे संसद में कहे जाने से डर रहे हैं.’
प्रधानमंत्री संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर पारंपरिक जवाब देने वाले हैं. गांधी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री सदन में आएंगे, तो वह उन्हें किताब सौंप देंगे.
उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री में आज लोकसभा आने की हिम्मत होगी. अगर वे आए, तो मैं जाकर यह किताब उन्हें दूंगा, ताकि वे इसे पढ़ सकें और देश को सच्चाई पता चल सके.’
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जब उन्हें बोलने से रोका गया, तो गांधी ने मंगलवार दोपहर को अपना जवाब फिर से शुरू किया. उन्होंने शुरुआत यह कहते हुए की कि उन्होंने नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा पर कारवां के लेख की प्रामाणिकता की पुष्टि कर ली है. गांधी बिना सीधे लेख से उद्धरण दिए बोलना चाहते थे, लेकिन स्पीकर के आसन की तरफ से आपत्ति जताते हुए अगले वक्ता का नाम पुकारा जाने लगा.
बाद में सभापीठ के खिलाफ विरोध जताने पर विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया.
जनवरी 2024 में द वायर ने रिपोर्ट किया था कि नरवणे की आत्मकथा, जिसका शीर्षक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी‘ (Four Stars of Destiny) है, को केंद्रीय रक्षा और विदेश मंत्रालयों से ‘मंजूरी का इंतजार’ है और इसके प्रकाशन में देरी हो रही है. जब द वायर ने नरवणे से किताब की अंतिम रिलीज़ तारीख के बारे में पूछा था, तो उन्होंने कहा था कि ‘इसके बारे में प्रकाशक से पूछिए