भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द करने और आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक की मांग की है. उन्होंने संसद में सब्सटैंटिव मोशन पेश कर विदेशी संस्थाओं से कथित संबंधों का आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने हाल में संसद के भीतर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आलोचना की थी.

नई दिल्ली: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की कोई तैयारी नहीं है. हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोकने की मांग करते हुए गुरुवार को उनके खिलाफ एक ठोस प्रस्ताव पेश किया है.
न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबे का कहना है कि यह विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक सब्सटैंटिव (ठोस) प्रस्ताव है. उनके अनुसार, प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया है कि राहुल गांधी के कथित संबंध सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन और यूएसएआईडी जैसी संस्थाओं से हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और अमेरिका जैसे देशों की यात्राएं करते रहे हैं और उनका जुड़ाव भारत-विरोधी ताकतों से बताया जाता है.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने इसे ‘पूरी तरह आत्मसमर्पण’ करार देते हुए आरोप लगाया था कि इस समझौते के जरिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई है और किसानों के हितों से समझौता किया गया है.
केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने यह भी कहा कि इस व्यापार समझौते के माध्यम से भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाया गया है, ताकि भाजपा की वित्तीय संरचना को बचाया जा सके. भारत-अमेरिका समझौते पर प्रहार करते हुए उन्होंने मार्शल आर्ट का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, पहले प्रतिद्वंद्वी को पकड़ में लिया जाता है, फिर उसकी गर्दन पर दबाव बनाया जाता है और अंत में वह हार मानने को मजबूर हो जाता है.
सब्सटैंटिव मोशन क्या होता है?
सब्सटैंटिव मोशन एक औपचारिक और गंभीर प्रस्ताव होता है, जिसे सदन के विचार और निर्णय के लिए पेश किया जाता है. यह अविश्वास प्रस्ताव या महाभियोग की तरह किसी उच्च पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ लाया जा सकता है.
ऐसे प्रस्ताव की स्वीकार्यता पर सदन में चर्चा होती है और प्रस्ताव लाने वाले सदस्य को अपने आरोपों और आधारों को स्पष्ट रूप से सिद्ध करना होता है.
पहले अदालत ने ‘अयोग्य’ घोषित किया था
उल्लेखनीय है कि साल 2023 में गुजरात में सूरत की एक अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनकी कथित ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ दायर 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में दो साल की जेल की सजा सुनाई थी.
हालांकि इसके कुछ ही देर बाद अदालत ने गांधी की जमानत मंजूर कर ली और उन्हें अपील करने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों के लिए सजा पर रोक लगा दी. राहुल के खिलाफ भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी द्वारा 13 अप्रैल, 2019 को केस दर्ज कराया गया था. उन्होंने कर्नाटक के कोलार में लोकसभा चुनाव के समय एक रैली में राहुल द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर शिकायत की थी.
राहुल गांधी ने कथित तौर पर रैली के दौरान कहा था, ‘सभी चोर, चाहे वह नीरव मोदी हों, ललित मोदी हों या नरेंद्र मोदी, उनके नाम में मोदी क्यों है.’
दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद राहुल गांधी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया. लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया था कि वायनाड से सांसद राहुल गांधी को 23 मार्च 2023 से अयोग्य घोषित कर दिया गया है.
उस साल के बजट सत्र में राहुल गांधी ने कारोबारी गौतम अडानी के समूह और नरेंद्र मोदी के बीच संबंधों को लेकर भाषण दिया था, जिसके अगले दिन इस भाषण के अंश रिकॉर्ड से हटा दिए गए थे. तब कांग्रेस ने दावा किया था कि सूरत कोर्ट के फैसले का रिश्ता राहुल गांधी के उक्त भाषण से था.