ईएसबी की भर्ती परीक्षाओं में फिर से शुरू की जाएगी निगेटिव मार्किंग

मनीष द्विवेदी/भोपाल/मंगल भारत। मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की भर्ती परीक्षाओं में अब तुक्केबाजी नहीं चलेगी। ईएसबी ने एग्जाम पैटर्न में बड़ा बदलाव करते हुए अपनी भर्ती परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू करने का निर्णय लिया है। साथ ही मंडल ने सख्ती बरतते हुए परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर केंद्रीय पर्यवेक्षक (सेंट्रल ऑब्जर्वर) तैनात करने का फैसला किया है। मप्र कर्मचारी चयन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। पूर्व में कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग की जाती थी, लेकिन वर्ष 2011-12 परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग बंद कर दी गई थी। परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से लगातार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग शुरू की मांग की जा रही थी, ताकि अभ्यर्थी परीक्षाओं को गंभीरता से लें। इसे देखते हुए मप्र कर्मचारी चयन मंडल के संचालक मंडल ने लंबे विचार-विमर्श के बाद भर्ती परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग शुरू करने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को राहत देते हुए निर्णय लिया है कि परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग में 1/4 का फार्मूला एप्लाई किया जाएगा। मंडल ने अपने निर्णयों के क्रियान्वयन की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। आने वाले महीनों में होने वाली भर्ती परीक्षाओं ये बदलाव नजर आएंगे। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा व्यवस्था में परिवर्तन से परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक कर्मचारी चयन मंडल की ओर से पूर्व में आयोजित कुछ परीक्षाओं में परीक्षा केंद्र विशेष पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। मंडल ने इन शिकायतों की जांच भी कराई है। चूंकि आने वाले वर्षों में विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित होना है। गौरतलब है कि कर्मचारी चयन मंडल की ओर से वर्ष 2026 में 11 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इन भर्ती परीक्षाओं के जरिए 5,528 पद भरे जाएंगे। ईएसबी ने परीक्षाओं का कैलेंडर जारी कर दिया है। सरकार ने कर्मचारी चयन मंडल को भर्ती परीक्षाएं समय पर कराने के निर्देश जारी किए हैं। इससे माना जा रहा है कि इस साल प्रस्तावित भर्ती परीक्षाएं निर्धारित समय पर आयोजित होंगी। पिछले साल कर्मचारी चयन मंडल कुछ परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं कर पाया था। कर्मचारी चयन मंडल ने इस साल की पहली भर्ती परीक्षा-आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर का कार्यक्रम तय कर दिया है। इसके लिए आवेदन भी भरे जा चुके हैं। भर्ती परीक्षा 27 फरवरी से होगी।
मप्र कर्मचारी चयन मंडल नहीं चाहता की किसी भी परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी की शिकायत सामने आए। इसलिए मंडल ने निर्णय लिया है कि पूर्व में जिन परीक्षा केंद्रों की कोई शिकायत मिली है या ऐसे परीक्षा केंद्र जहां गड़बड़ी की आशंका है, वहां पर केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, वित्त सेवा के रिटायर्ड अधिकारी और बिग्रेडियर रैंक से ऊपर के रिटायर्ड आर्मी पर्सन को परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया जाएगा। उन्हें मानदेय के तौर पर रोजाना 4 हजार रुपए दिए जाएंगे। केंद्रीय पर्यवेक्षक के लिए पात्र रिटायर्ड अधिकारियों से संपर्क कर उनकी सूची तैयार की जाएगी, ताकि जरूरत पडऩे पर उनसे कॉन्टेक्ट किया जा सके।
नेगेटिव मार्किंग की मांग लंबे समय से
वर्तमान में कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से लंबे समय से कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू करने की मांग की जा रही थी। उनकी मांगों को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श करने के बाद हाल में हुई कर्मचारी चयन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में एग्जाम पैटर्न में बदलाव करते हुए परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य यह है कि अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी गंभीरता से करें और परीक्षा को गंभीरता से लेने वाले अभ्यर्थियों को एग्जाम पैटर्न में बदलाव का फायदा मिले। परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग (नकारात्मक अंकन) का अर्थ है कि किसी प्रश्न का गलत उत्तर देने पर न केवल उस प्रश्न के अंक कटते हैं, बल्कि सही उत्तरों में से भी निश्चित अंक काट लिए जाते हैं। जिन प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया जाता है, उनके कोई अंक नहीं काटे जाते है। कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारियों का कहना है कि सामान्यत: परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग में 1/3 का फार्मूला अपनाया जाता है, लेकिन मंडल ने अपने अभ्यर्थियों को राहत देने के मकसद से परीक्षा में 1/4 का फार्मूला एप्लाई करने का निर्णय लिया है। उदाहरण के तौर पर यदि परीक्षा के प्रश्न पत्र में कुल 50 प्रश्न हैं और प्रत्येक प्रश्न के है और उनमें से 10 गलत प्रश्न टिक किए हैं, तो प्रत्येक गलत प्रश्न के लिए 0.25 अंक काटे जाएंगे। लिए 1 अंक निर्धारित है।