रेलवे की नई व्यवस्था: चलती ट्रेन में अब हर 1-2 घंटे में होगी कोच की सफाई

रेलवे की नई व्यवस्था: चलती ट्रेन में अब हर 1-2 घंटे में होगी कोच की सफाई

ट्रेनों में साफ-सफाई के लिए रेलवे नई व्यवस्था अपनाने जा रहा है। अब आरक्षित श्रेणी के साथ ही अनारक्षित कोचों की भी यात्रा के दौरान सफाई होगी। यह व्यवस्था सबसे पहले अगले छह महीनों में 80 ट्रेनों में लागू होगी। रेलवे ने ‘52 सप्ताह, 52 रिफॉर्म’ का संकल्प लिया है। इसके तहत हर सप्ताह एक रिफॉर्म करने की योजना है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब चलती ट्रेनों में बाथरूम, डस्टबिन, कोच की सफाई नियमित अंतराल यानी 1 से 2 घंटे के अंदर होती रहेगी। पहले चरण में यह व्यवस्था लंबी दूरी की 80 ट्रेनों में लागू होगी। सफाई नहीं हुई या ठीक से नहीं हुई तो यात्री फोटो रेल वन ऐप या रेलवे के सोशल मीडिया हैंडल पर डाल सकेंगे। छोटी-मोटी इलेक्ट्रिक मरम्मत जैसे लाइट या स्विच काम न करने जैसी शिकायतों को भी चलती ट्रेन में दूर किया जा सकेगा। हर जोन से 5-6 ट्रेनों को पहले चरण में चिह्नित कर सफाई व्यवस्था लागू होगी। रेल मंत्री ने कहा कि पहले लिनेन उपलब्ध कराने वाला वेंडर अलग था, बाथरूम, कोच सफाई का अलग। अब पारदर्शी तरीके से काम दिया जाएगा, ताकि जिम्मेदारी एक जगह हो। सफाई की निगरानी एआई कैमरों से होगी। इस अभियान के तहत एक इंटीग्रेटेड सिस्टम भी लगाया जाएगा। जिससे कोच की सफाई व्यवस्था को बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा। अगर जनरल कोच कनेक्ट नहीं होगा तो स्टाफ उतरकर जनरल कोच की सफाई करेगा। इसके लिए रूट आधारित टीमें तैनात की जाएगी, जो तय रूट पर लगातार काम करेंगी।

भारी बेइज्जती: आईडी कार्ड दिखाओ! म्यूनिख में गेट पर असीम मुनीर को रोका
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर को उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब जर्मनी में सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें एक साधारण प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के अनुसार, जब मुनीर अपनी टीम के साथ कॉन्फ्रेंस वेन्यू में प्रवेश कर रहे थे, तब वहां तैनात एक महिला सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें रोक दिया। सुरक्षा अधिकारी ने न केवल उनकी पहचान सुनिश्चित की, बल्कि उन्हें अपना आइडेंटिटी कार्ड सीधा करने का निर्देश भी दिया ताकि उसे स्कैन या चेक किया जा सके। एक सेना प्रमुख के लिए, जिन्हें अपने देश में असीमित शक्तियां प्राप्त हैं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक आम नागरिक की तरह आईडी कार्ड दिखाना चर्चा और बेइज्जती का विषय बन गया है।
बड़ा खतरा: देश में मिजोरम बन गया एचआईवी का हॉटस्पॉट
एचआईवी संक्रमण के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय रहे हैं। ये हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण भी बन रहा है। एचआईवी संक्रमण के कारण एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम का खतरा होता है। साल 2024 के आखिर तक दुनियाभर में 40.8 मिलियन (4 करोड़ से अधिक) लोग एचआईवी के साथ जी रहे थे। इस साल 13 लाख नए केस भी सामने आए जबकि 6.30 लाख लोगों की इस संक्रमण से मौत भी हो गई। दावा किया जा रहा है कि 2029 तक 40 लाख एड्स से मौतें और 60 लाख एचआईवी संक्रमण के केस बढ़ जाएंगे। भारत में भी एचआईवी-एड्स को बड़े संकट के तौर पर देखा जाता रहा है। मिजोरम की स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने राज्य में एचआईवी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई है। डेटा से पता चलता है कि मिजोरम में एचआईवी के केस नेशनल एवरेज से 13 गुना ज्यादा हैं। एचआईवी की नेशनल प्रिवेलेंस रेट 0.2 प्रतिशत है, मिजोरम में ये बढक़र 2.74 प्रतिशत हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, राज्य में बढ़ते एचआईवी के मामले स्वास्थ्य के लिए तो संकट का विषय हैं ही साथ ही ये मिजो समाज के नैतिक और धार्मिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, कंडोम के इस्तेमाल जैसे तरीके इस यौन संचारित रोग को रोकने का सबसे सुरक्षित तरीका है।
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, शुरू होगी यात्रा
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे। महाशिवरात्रि के अवसर पर पंचकेदार गद्दीस्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में वैदिक विधि-विधान और पंचांग गणना के बाद शुभ मुहूर्त की औपचारिक घोषणा की गई। इस वर्ष कपाट वृष लग्न में खुलेंगे, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। तिथि घोषित होते ही शासन-प्रशासन और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने यात्रा तैयारियों को तेज कर दिया है। पैदल मार्ग से बर्फ हटाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सुविधाएं दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर जारी है।