संसद के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2020-21 से 2024-25 के बीच न्यूनतम शेष राशि न रखने पर खाताधारकों से जुर्माने के रूप में 8,621.12 करोड़ रुपये वसूले हैं. संसदीय समिति ने बैंकों से बचत खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को ख़त्म करने का आग्रह किया है.

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा मिनिमम बैलेंस (न्यूनतम शेष राशि ) न रखने पर लगने वाले शुल्क को माफ करने के बावजूद संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2020-21 से 2024-25 के बीच मिनिमम बैलेंस न रखने पर खाताधारकों से जुर्माने के रूप में 8,621.12 करोड़ रुपये वसूले हैं.
डेक्कन हेराल्ड की ख़बर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र इस सूची में शीर्ष पर हैं. इन पांच सालों की अवधि में सबसे अधिक जुर्माना वसूलने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में कर्नाटक चौथे स्थान पर है, उसके बाद बिहार का नंबर है.
वहीं, इस संबंध में लोकसभा की याचिका समिति ने बैंकों से मिनिमम बैलेंस न रखने पर ग्राहकों से जुर्माना वसूलने के चलन को बंद करने का आग्रह किया है.
उल्लेखनीय है कि पांच वित्तीय वर्षों में उत्तर प्रदेश से जुर्माने के तौर पर सबसे अधिक 1,233.97 करोड़ रुपये वसूले गए. इसके बाद तमिलनाडु से 1,21.38 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र 1,088.18 करोड़ रुपये और कर्नाटक 529.20 करोड़ रुपये वसूल किए गए.
एक विश्लेषण से पता चला कि 2020-21 और 2023-24 के बीच जुर्माने की वसूली में वृद्धि हुई, लेकिन 2024-25 में इसमें गिरावट आई.
मार्च 2020 में एसबीआई द्वारा बचत बैंक खातों (सेविंग अकाउंट) पर लगाए गए जुर्माने को बंद करने के बावजूद, जुर्माने की राशि 2020-21 में 1,148.71 करोड़ रुपये से बढ़कर अगले तीन वित्तीय वर्षों में क्रमशः 1,415.65 करोड़ रुपये, 1,785.90 करोड़ रुपये और 2,225.10 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, बाद में इसमें कमी देखी गई.
इस संबंध में एक ओर जहां राष्ट्रीय स्तर पर 2024-25 में गिरावट देखी गई, वहीं छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 2023-25 की तुलना में वृद्धि हुई. तमिलनाडु में सबसे अधिक 43.22 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई – जो 2024-25 में 233.12 करोड़ रुपये से बढ़कर 276.34 करोड़ रुपये हो गई.
कर्नाटक को छोड़कर सभी दक्षिण भारतीय राज्यों में बैंकों द्वारा जुर्माने की वसूली में वृद्धि देखी गई. बैंकों ने 2020-21 में कर्नाटक से 65.19 करोड़ रुपये और उसके बाद अगले वित्तीय वर्ष में क्रमशः 103.75 करोड़ रुपये, 104.53 करोड़ रुपये, 133.29 करोड़ रुपये और 122.41 करोड़ रुपये एकत्र किए.
गौरतलब है कि जुर्माने की वसूली में सबसे बड़ी गिरावट उत्तर प्रदेश में देखी गई, जो 2023-24 में 339.10 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 287.87 करोड़ रुपये रह गई, यानी 51.84 करोड़ रुपये की भारी कमी.
मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पंजाब में भी जुर्माने की वसूली में गिरावट देखी गई. संसदीय समिति ने कहा कि उसका दृढ़ मत है कि कुछ बैंकों द्वारा बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि न रखने पर लगने वाले जुर्माने को माफ करने का निर्णय सभी हितधारकों के हित में है.
समिति यह भी सिफारिश कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक चालू खाते रखने वाले सूक्ष्म उद्यमियों, स्वरोजगारियों और छोटे व्यापारियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखें और न्यूनतम शेष राशि न रखने पर बार-बार जुर्माना लगाकर उन्हें परेशान न करें.