पिछले महीने गृह मंत्रालय द्वारा सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को भेजे गए एक क्लासीफाइड नोट में अधिकारियों को चेतावनी दी है कि मीडिया के साथ ‘गोपनीय/संवेदनशील’ जानकारी साझा करने पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि मीडिया के साथ ‘गोपनीय/संवेदनशील’ जानकारी साझा करने पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) के तहत कार्रवाई की जा सकती है. यह संदेश पिछले महीने गृह मंत्रालय द्वारा सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को भेजे गए एक गोपनीय नोट (classified note) के ज़रिए दिया गया है.
गृह मंत्रालय ने 28 साल पहले जारी एक परिपत्र को अपडेट किया है और उसमें ओएसए के तहत कार्रवाई की चेतावनी जोड़ी है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, परिपत्र में कहा गया है, ‘यह कदम संवेदनशील सूचनाओं के अनधिकृत या अवांछनीय तत्वों तक लीक होने की घटनाओं में अचानक वृद्धि के मद्देनज़र उठाया गया है, जो संपूर्ण राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं और सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती हैं.’
अख़बार के मुताबिक, यह परिपत्र ‘मीडिया के साथ किसी भी अनधिकृत संवाद’ पर भी लागू होता है. इसमें कहा गया है कि ऐसे मामलों में ‘उचित कार्रवाई’ की जानी चाहिए. हालांकि, यह प्रावधान अधिकृत प्रवक्ताओं पर लागू नहीं होगा.
रिपोर्ट में नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले सूत्रों के हवाले से कहा गया है, ‘सरकारी सेवकों का यह कर्तव्य है कि आधिकारिक कार्यों के दौरान जिन सूचनाओं और दस्तावेज़ों तक उनकी पहुंच होती है, उनकी सुरक्षा करें. मीडिया के साथ किसी भी अनधिकृत संवाद पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए और यदि कोई गोपनीय/संवेदनशील जानकारी साझा की जाती है, तब आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए.’
अख़बार ने पीआईबी और गृह मंत्रालय के प्रवक्ताओं से संपर्क किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
दिसंबर 1998 में जारी मूल परिपत्र में ओएसए का कोई उल्लेख नहीं था और वह सलाह देने वाली प्रकृति का था. परिपत्र में कहा गया है, ‘यह दोहराया जाता है कि किसी सरकारी सेवक द्वारा इस तरह की चूक सीसीएस (आचरण) नियमों के नियम 11 का स्पष्ट उल्लंघन है.’
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी नोट में अधिकारियों से कहा गया है कि वे पत्रकारों के किसी भी सवाल को प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की ओर भेजें या जवाब देने से पहले सचिव की अनुमति लें.