हाई कोर्ट से भोपाल निगम कमिश्नर जैन को मिली राहत, अवमानना आदेश निरस्त

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने रोक लगा दी है। बेंच ने सिंगल बेंच का आदेश निरस्त कर दिया है। हालांकि, मूल रिट याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। मामला में पहले भी कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई जा चुकी थी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने यह आदेश मर्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़े प्रकरण में पारित किया। कंपनी का आरोप था कि निगम ने उसकी संपत्ति के अगले हिस्से को कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए निगमायुक्त को अवमानना का दोषी ठहराया था। निगमायुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस रूपराह और सुयश मोहन गुरु ने दलील दी कि अवमानना तभी बनती है, जब कोर्ट के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया गया हो, जबकि याचिका में ऐसा कोई स्पष्ट आरोप या तथ्य नहीं है जिससे कोर्ट के आदेश की अवहेलना सिद्ध हो।
न्यायमित्र टिप्पणी दें बिना एनओसी चलते उद्योगों को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश
बढ़ते प्रदूषण और बगैर अनुमति के चल रहे उद्योगों पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान याचिका दायर करते हुए सुनवाई शुरू की थी। बुधवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने सुनवाई की। राज्य सरकार के जवाब पर इस केस में न्याय मित्र बनाए गए वरिष्ठ अभिभाषक अमित अग्रवाल को टिप्पणी देने के. लिए कोर्ट ने कहा है। इसके लिए 9 मार्च तक का समय दिया है। मामले में सरकार ने माना है कि 1008 उद्योग बगैर एनओसी चल रहे थे। इन सभी को नोटिस देकर एनओसी लेने या उद्योग बंद करने की चेतावनी दी है। वहीं 3200 इंडस्ट्री बंद हो चुकी हैं, इनमें एनओसी की जरूरत नहीं है।
मप्र पुलिस का ई-साक्ष्य पर फोकस… कैमरा, कंप्यूटर, टैबलेट से जांच होगी तेज
मप्र पुलिस को आधुनिक चुनौतियों और नई आपराधिक न्याय प्रणाली के अनुरूप ढालने के लिए बजट में 13,406.99 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ई-साक्ष्य और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर खास फोकस रखते हुए 298.21 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। कैमरा, कंप्यूटर और टैबलेट के जरिए जांच तेज की जाएगी, ताकि घटनास्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्य सीधे ई-साक्ष्यं पोर्टल पर अपलोड हो सकें। कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल डेटा मैनेजमेंट और फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन को मजबूत किया जाएगा। फॉरेंसिक विज्ञान के लिए 62.78 करोड़ और सीआईडी को 391.72 करोड़ रुपए दिए गए हैं।
ईओडब्ल्यू: 6 साल में सिर्फ 70 केस में हो सके फैसले
आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में शिकायत, एफआईआर, जांच और सजा की गति बेहद धीमी है। यहां साल 2020 से 2025 के बीच न्यायालय में केवल 70 आपराधिक प्रकरणों में निर्णय हो पाया है। इनमें से 40 मामलों में आरोपियों को सजा हुई, जबकि 30 मामलों में वे बरी हुए। इस अवधि में आरोपियों को सजा मिलने की दर 57 प्रतिशत रही है। कमाल की बात यह है कि इन 70 प्रकरणों में औसतन 13 साल 7 माह में फैसला हो सकता है। सबसे पुराने मामलों में अपराध क्रमांक 45/90 में 33 साल बाद, 57/95 में 28 साल बाद, 24/96 में 29 साल बाद और 139/99 में 26 साल बाद निर्णय आया है। जबकि सबसे कम अवधि में अपराध क्रमांक 12/22 का फैसला 1 साल में, 65/21 का 2 साल में और 43/21 का 4 साल में हुआ। यह अतिकारी कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय के प्रश्न के उत्तर में सीएम नेि विधानसभा में दी।