विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी
भोपाल/मंगल भारत

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में विधायकों के सवालों पर सरकारी की ओर से विभागीय मंत्री जवाब दे रहे है। इसी कड़ी में विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि- एमपी में शिक्षकों के 1 लाख 15 हजार 678 पद खाली है। स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक के स्वीकृत 289005 पद। 174419 कार्यरत और 115678 पद रिक्त हैं। जो स्वीकृत पद के 40 प्रतिशत है प्राथमिक विद्यालय में स्वीकृत 133576 पद में 55626। माध्यमिक विद्यालय में 110883 पद में 44546 तथा उच्च माध्यमिक के 44546 पद में से 15506 पद रिक्त हैं।
उदय प्रताप सिंह ने बताया कि 22973 परिसर में एक शाला एक परिसर के तहत उनमें 49477 शाला विलय कर दी गई। प्रदेश में 83514 विद्यालय में से 1968 स्कूलों में एक शिक्षक तथा 46417 विद्यालय में दो शिक्षक हैं तथा उनमें नामांकन क्रमश: 41965 तथा 1373270 हैं। एक शिक्षकीय में सबसे ज़्यादा धार में 144 विद्यालय हैं। वहीं प्रताप ग्रेवाल द्वारा जीर्ण शीर्ण भवन तथा शौचालय की जानकारी मांगने पर बताया कि 5735 प्राथमिक विद्यालय जीर्ण शीर्ण है। 1725 विद्यालय में बालक शौचालय तथा 1784 में बालिका शौचालय भी नहीं है। उच्च माध्यमिक विद्यालय में 75 बालक शौचालय 43 बालिका शौचालय नहीं है। जीर्ण शीर्ण विद्यालय में सबसे ज्यादा झाबुआ में 618 तथा धार में 550 विद्यालय हैं।
भर्ती केवल 15000 पदों पर
प्रदेश के स्कूलों में शिक्षा भगवान भरोसे है। स्कूलों न केवल शिक्षकों की भारी कमी है बल्कि हजारों स्कूलों के पास सुरक्षित भवन और छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं है। खासकर आदिवासी बहुल जिलों जैसे धार और झाबुआ में हालात और भी बदतर हैं। हालांकि सरकार ने करीब 15000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। उदय प्रताप सिंह ने बताया कि 20 से कम विद्यार्थी वाले स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विद्यालय 11889 में 148817 छात्र है तथा 23873 अध्यापक है याने प्रत्येक विद्यालय में औसतन 13 विद्यार्थी तथा दो अध्यापक हैं। जनजाति कार्य विभाग द्वारा संचालित 3773 शाला में 51230 विद्यार्थी तथा 7490 अध्यापक हैं यानी प्रत्येक विद्यालय में संख्या विद्यार्थी हैं लोकल बॉडी में 8 स्कूल मिलकर 15670 विद्यालय में 20 से कम विद्यार्थी हैं। 20 से कम में सबसे ज़्यादा सिवनी में 639, रायसेन में 624, रीवा में 558, धार में 496 विद्यालय है। शिक्षकों की भारी कमी पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा- शिक्षकों की भर्ती हो रही है, आगे भी भर्ती करेंगे। कहीं कोई दिक्कत है तो अतिथि शिक्षकों से कमी दूर करेंगे।
एक शिक्षक के भरोसे चल रहे 1968 स्कूल
स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया, कुल 83,514 स्कूलों में 1,968 ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक हैं। जबकि वहां 41965 बच्चों ने प्रवेश लिया। वहीं 46,417 स्कूल दो शिक्षकों के भरोसे हैं, इनमें 13 लाख 73 हजार 270 बच्चों के नामांकन दर्ज हैं। प्रदेश में 11,889 स्कूल ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से भी कम है। इन स्कूलों में औसतन प्रति विद्यालय मात्र 13 छात्र हैं, जबकि वहां दो अध्यापक तैनात हैं। कम नामांकन वाले स्कूलों में सिवनी (639), रायसेन (624) और रीवा (558) सबसे ऊपर हैं। जनजाति कार्य विभाग द्वारा संचालित 3773 शालाओं में 51230 विद्यार्थी तथा 7490 अध्यापक हैं। भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने भी सिवनी में जर्जर स्कूलों की समस्या को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री को घेरा। विधानसभा में उन्होंने कहा कि जब हम स्कूल में जाते हैं और बच्चे उन्हें टूटी हुई छतें दिखाते हैं।