जबलपुर ज़िले के सिहोरा में एक ही समय पर आरती और नमाज़ को लेकर उपजे विवाद ने गुरुवार को सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया. अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में कोई जनहानि नहीं हुई है और अब तक 49 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. फिलहाल इलाके में शांति बहाल करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले के सिहोरा में एक ही समय पर आरती और नमाज को लेकर उपजे विवाद ने सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया, जिसके बाद दो समुदायों के सदस्यों के बीच झड़प, पथराव और तोड़फोड़ के कारण तनाव फैल गया.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, अधिकारियों ने शुक्रवार (20 फरवरी) को बताया कि अब तक इस मामले में कोई जनहानि नहीं हुई है, और अब तक 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
अखबार ने अधिकारियोंं के हवाले से बताया है कि यह घटना गुरुवार रात करीब 10 बजे आज़ाद चौक इलाके की है. यहां तनाव बढ़ने के बाद इलाके में में शांति बहाल करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है.
इस संबंध में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति से अवगत है और प्रशासन प्रभावी ढंग से अपना कर्तव्य निभा रहा है.
दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़
इस घटना को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आज़ाद चौक इलाके में देवी दुर्गा का एक मंदिर और मस्जिद आस-पास स्थित हैं. यहां मंदिर में आरती के दौरान सुरक्षा ग्रिल को नुकसान पहुंचाने के दावे को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके और वहां की दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ की गई.
इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने कहा कि पुलिस ने पहले हल्का बल प्रयोग किया, लेकिन बाद में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आठ से दस आंसू गैस के गोले दागे गए.
वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बाद में स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल का दौरा किया, जिसके बाद ज़िले के बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और उनकी तैनाती की गई.
इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने कहा, ‘हमने इस मामले में अब तक 49 लोगों को गिरफ्तार किया है. हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’
उन्होंने आगे बताया कि प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मंदिर में तोड़फोड़ की गई और यह भी दावा किया कि उनके ज्ञापन में उल्लिखित एक अन्य पूजा स्थल के पास पत्थर जमा किए गए थे.
हालांकि, जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मंदिर को निशाना बनाने की खबरों से इनकार करते हुए कहा कि पत्थरबाजी दो गुटों तक ही सीमित थी और इसलिए वह सुरक्षित है.
उन्होंने निषेधाज्ञा लागू करने की संभावना से इनकार किया.
इस झड़प के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए हैं, जिसमें इस सांप्रदायिक तनाव को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं.
इस मामले पर भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए खेल, युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश एक शांतिपूर्ण राज्य है और किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.
मस्जिद की छत से पत्थर फेंके जाने के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए सारंग ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
उन्होंने कहा, ‘किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. मस्जिद पर पत्थर कैसे जमा हुए, यह जांच का विषय है.’
दक्षिणपंथी संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर हनुमान चालीसा का पाठ किया
इसके बाद शुक्रवार दोपहर को एक दक्षिणपंथी संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं ने सिहोरा पुलिस स्टेशन का घेराव किया और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए सड़क पर बैठ गए. उन्होंने तोड़फोड़ में शामिल लोगों के घरों को गिराने की मांग की.
इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए स्थानीय पार्षद और मुस्लिम नेता अरशद खान ने कहा कि जो हुआ वह निंदनीय है.
उन्होंने कहा, ‘मज़ार में तोड़फोड़ की गई… हमारे लिए मजार और मंदिर एक समान हैं. मैं पिछले 15 वर्षों से जनप्रतिनिधि हूं और चाहता हूं कि दोनों पूजा स्थल सुरक्षित रहें.’
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए 10 से 12 लोग निर्दोष हैं और हिंसा में उनकी कोई भूमिका न होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया.’
उन्होंने निर्दोष लोगों को छोड़ने की अपील करते हुए, हिंसा में शामिल लोगों के लिए सज़ा की बात कही. उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान 20 से 30 मोटरसाइकिलें और पांच कारें क्षतिग्रस्त हुई हैं.