शकुंभरी पीठाधीश्वर अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 18 जनवरी को प्रयागराज में माघ मेले के दौरान ‘गुरु सेवा’ के बहाने आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ जबरन यौन शोषण किया. उसी दिन उनके समर्थकों पर कथित हमले को लेकर उनका प्रयागराज ज़िला प्रशासन से टकराव हुआ था.

नई दिल्ली: इलाहाबाद की एक विशेष अदालत ने शनिवार (21 फरवरी) को उत्तर प्रदेश पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. यह आदेश उन आरोपों के संबंध में दिया गया है जिनमें कहा गया है कि उन्होंने अपने आश्रम में 14 और 17 वर्ष की दो नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया, जो पॉक्सो अधिनियम (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेज एक्ट) के तहत गठित अदालत की अध्यक्षता करते हैं, ने पुलिस को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों की पहचान और गरिमा की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
यह आदेश शकुंभरी पीठाधीश्वर अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिका में आरोप लगाया गया था कि धार्मिक नेता ने ‘गुरु सेवा’ के बहाने आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ जबरन यौन शोषण किया.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 7 फरवरी को अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद प्रयागराज पुलिस आयुक्त को कथित घटनाओं के संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जो अब अदालत में जमा कर दी गई है.
अदालत ने कहा कि आवेदक के आरोप शपथपत्रों से समर्थित हैं और इनकी प्रारंभिक जांच प्रयागराज पुलिस आयुक्त द्वारा की गई थी. जांच के दौरान दोनों पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि 18 जनवरी 2026 के आसपास प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान आरोपी ने उनका यौन शोषण किया. आरोप है कि सरस्वती ने गुरु-शिष्य संबंध के नाम पर धार्मिक मार्गदर्शन देने का दिखावा करते हुए यह कृत्य किया.
माघ मेला एक वार्षिक धार्मिक आयोजन है, जिसमें श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर एकत्र होते हैं, जिसे गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का संगम माना जाता है. इस दौरान सैकड़ों साधु-संत अपने शिविर लगाते हैं और लाखों श्रद्धालु वहां पहुंचते हैं.
आवेदक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों, जिनमें प्रयागराज पुलिस आयुक्त और स्थानीय थाना प्रभारी शामिल हैं, को लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई. इसके बाद उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
राजनीतिक विवाद भी जुड़ा
खुद को उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य बताने वाले सरस्वती पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं. हाल ही में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के दिन उनके समर्थकों पर कथित हमले को लेकर उनका प्रयागराज जिला प्रशासन से टकराव हुआ था. यह तारीख 18 जनवरी ही थी, जो नाबालिगों के कथित शोषण की तारीख भी बताई जा रही है.
अखबार के अनुसार, मेला प्रशासन ने उन्हें दो नोटिस जारी किए थे. पहले नोटिस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित ‘शंकराचार्य’ पदवी के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया, जबकि दूसरे में बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़कर ‘भगदड़ जैसी स्थिति’ पैदा करने का आरोप लगाया गया.
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों और धार्मिक नेताओं ने खुलकर सरस्वती का समर्थन किया था, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी.