शहर के स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक

मप्र के बड़े शहरों के स्कूल शिक्षकों से ओवरलोड हैं। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत तय हुआ अनुपात इनमें बिगड़ गया है। विधानसभा में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। जारी रिपोर्ट के मुताबिक शहरी क्षेत्र में तय संख्या के मुकाबले अधिक शिक्षक हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इससे उलट स्थिति है। कैग की विधानसभा के पटल पर पेश रिपोर्ट में स्कूल शिक्षा विभाग में व्याप्त अंधेरगदी और नियमों की अनदेखी की बात का खुलासा हुआ है। जिसमें जिला स्तर पर प्राथमिक शिक्षकों का युक्ति युक्तकरण नहीं होने की बात सामने आई है।
मप्र में बेहतर शिक्षा व्यवस्था मुहैया कराने का दावा करने वाले स्कूल शिक्षा विभाग की कैग रिपोर्ट ने पोल खोल दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी स्कूलों में अधिशेष शिक्षक पदस्थ है, जबकि गांवों में कई ऐसे स्कूल है, जहां पर शिक्षकों की कमी की वजह से पढ़ाई प्रभावित होती है। यह स्थिति तब है, जब सूबे के स्कूल शिक्षा विभाग ने शहरीय क्षेत्रों में अतिरिक्त शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ करने का निर्देश जारी किया हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल जिले के शहरी क्षेत्रों में आने वाले स्कूलों के स्वीकृत 2655 पदों की तुलना में 2865 शिक्षक पदस्थ है, जो 108 अधिशेष प्रतिशत है। जबकि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में स्वीकृत 2953 पदों की तुलना में 2523 शिक्षक कार्यरत रहे, जो पदस्थापना का 85 प्रतिशत है। इसी तरह दतिया जिले के शहरी स्कूलों के स्वीकृत 658 पदों के सापेक्ष 708 शिक्षक पदस्थ है, यह अधिशेष पदस्थापना 108 प्रतिशत है। जबकि इसी जिले ग्रामीण स्कूलों के स्वीकृत 4193 शिक्षक पदों में से 3405 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत है, ऐसे में इन क्षेत्रों में 19 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है।
शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2022 तक मध्यप्रदेश में 6 आदिवासी एवं 46 गैर-आदिवासी सहित 52 जिले है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 46 गैर आदिवासी जिलों में 1,72,336 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 1,56,084 प्राथमिक कार्यरत थे, जबकि आरटीई मापदण्डों के अनुसार 1,53,643 प्राथमिक शिक्षकों की आवश्यकता थी, लेकिन इन जिलों में 2,441 प्राथमिक शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ थे। प्राथमिक शिक्षक सर्वर्ग में अधिशेष के कारण स्थानीय निकायों द्वारा मूल रुप से नियुक्त शिक्षकों का एसईडी में विलय, कर्मचारियों की पदोन्नति में देरी एवं पिछले 8 वर्षों में पदों के युक्ति युक्तकरण की कमी थी। इन असंतुलनों के बावजूद विभाग ने अधिशेष को पुनर्वितरित या समायोजित किए बिना 7,429 नए प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती कर दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि शासन द्वारा कहा गया कि प्राथमिक शिक्षक, जिला संवर्ग का पद होने के कारण, जिलों से बाहर स्थानांतरित नहीं किया जा सता, क्योंकि इससे न्यायालयीन वाद के मामले बढ़ेंगे। सरकार की इस दलील को लेखापरीक्षा ने स्वीकार नहीं किया और कहा कि 2019 से 2022 के बीच विभाग ने अधिशेष स्टाफ वाले 25 जिलों से एवं उनमें कुल 5,649 शिक्षकों का स्थानांतरण किया। इससे यह पता चलता है कि प्राथमिक शिक्षक एवं जिला संवर्ग का पद होने के बावजूद शासन ने नियमित रुप से शिक्षकों को अन्य जिलों में स्थानांतरित कर दिया। इसी तरह रिपोर्ट में पदस्थापना में असंतुलन की स्थिति पर भी एतराज जताया गया है। इस मामले में कहा गया है कि जून 2019 में मध्यप्रदेश शासन ने राज्य के विभागों में पदों के युक्तियुक्तकरण के संबंध में आदेश जारी किया था, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि जिन कार्यालयों में स्वीकृत पदों से अधिक स्टाफ पदस्थ हैं, वहां से अधिशेष स्टाफ को उन कार्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां पदों के युक्ति युक्तकरण के लिए रिक्तियां उपलब्ध हैं। उक्त आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रतिष्ठान में स्वीकृत पदों से अधिक स्टाफ नहीं होंगे। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग का पहले से ही आदेश जारी था कि यदि किसी जिले के शहरी क्षेत्रों में अतिरिक्त शिक्षक पदस्थ हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है, तो शहरीय अधिशेष शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ किए जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में 70.30 प्रतिशत शिक्षक
रिपोर्ट में कहा गया कि लेखा परीक्षा के दौरान यह पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 62,213 स्कूल थे, जिनमें 2,81,887 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 1,98,175 यानि कि 70.30 प्रतिशत शिक्षक कार्यरत थे। इसी तरह 4,601 शहरी स्कूलों में स्वीकृत पद 47,556 के सापेक्ष 43,319(91.09 प्रतिशत) शिक्षक कार्यरत थे, यानि कि यह पूरी तरह से साफ है कि चयनित जिलों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति में असंतुलन था। रिपोर्ट में जो तथ्य दिए गए है उनमें ग्वालियर, बैतूल और दतिया के साथ भोपाल जिला भी शामिल है, जहां के ग्रामीण और शहरीय क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन की स्थिति है। ग्वालियर जिले के शहरी क्षेत्रोंम 2560 स्वीकृत पदों की तुलना में 2904 शिक्षक कार्यरत रहे, जो 113 प्रतिशत अधिशेष है। जबकि इस जिले के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में स्वीकृत 4364 पदों की तुलना में 3607 शिक्षक कार्यरत है, यह संख्या पदस्थापना का 83 प्रतिशत है, यानि कि 17 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी पाई गई। इसी तरह बैतूल जिले के शहरी क्षेत्रों के स्कूलों के 503 पदों की तुलना में 559 (111 प्रतिशत अधिशेष), जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 4294 पदों की तुलना में 3541 शिक्षक ही पदस्थ रहे, यानि कि यहां भी 18 प्रतिशत शिक्षकों की कमी रही है।