अडानी कंपनियों के जांच में भाग न लेने के बाद अमेरिका ने भारतीय सोलर निर्यात पर 126% टैरिफ लगाया: रिपोर्ट

अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले सोलर उत्पादों पर 126% का दंडात्मक टैरिफ लगाया है. यह कार्रवाई अडानी समूह की दो कंपनियों- मुंद्रा सोलर एनर्जी और मुंद्रा सोलर पीवी का अमेरिकी जांच प्रक्रिया से हटने के बाद की गई है.

नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले सोलर उत्पादों पर 126% का भारी दंडात्मक टैरिफ लगाया है. यह कार्रवाई अडानी समूह की दो कंपनियों- मुंद्रा सोलर एनर्जी और मुंद्रा सोलर पीवी का अमेरिकी जांच प्रक्रिया से बाहर हो जाने के बाद की गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों कंपनियों को जांच में ‘अनिवार्य उत्तरदाता’ (mandatory respondents) के रूप में चिह्नित किया गया था. जांच में भाग न लेने के कारण अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने इनके खिलाफ ‘एडवर्स फैक्ट्स अवेलेबल’ के तहत दंड लगाया. यह दंड पूरे सेक्टर पर 20 फरवरी से लागू किया गया.

एंटी-सब्सिडी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कंपनियों ने विभाग द्वारा मांगी गई जरूरी जानकारी नहीं दी, तय समयसीमा में जवाब नहीं दिया और शुरुआती प्रश्नावली का आंशिक या पूर्ण रूप से उत्तर न देकर जांच प्रक्रिया में बाधा डाली.

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह भी पाया कि कंपनियों ने कम समय में बड़ी मात्रा में सोलर सेल्स का निर्यात किया और भारत सरकार की कई योजनाओं का लाभ लिया. इनमें एडवांस ऑथराइजेशन/एडवांस लाइसेंस प्रोग्राम, ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट ऑथराइजेशन स्कीम, ड्यूटी ड्रॉबैक प्रोग्राम और एक्सपोर्ट प्रमोशन ऑफ कैपिटल गुड्स स्कीम शामिल हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारतीय सोलर उद्योग, सोलर आयात के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है. याचिकाकर्ता द्वारा दी गई जानकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि चीन का भारत में निवेश भी कंबोडिया, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में उत्पादन इकाइयों में निवेश की उसकी वैश्विक रणनीति से जुड़ा है.

नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के प्रमुख और पूर्व ट्रेड अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने अख़बार को बताया कि नवंबर में अडानी समूह से जुड़ी कंपनियों के जांच से हटने के बाद यह मामला और ज्यादा ‘दंडात्मक’ हो गया.

उन्होंने कहा कि वारी एनर्जीज़ जैसी अन्य भारतीय कंपनियां इस प्रक्रिया में रुचि रखने वाले पक्ष के रूप में शामिल रहीं, लेकिन जिन निर्यातकों की अलग से जांच नहीं हुई, उन पर भी फिलहाल 125.9% की ही प्रारंभिक दर लागू है.

उन्होंने बताया कि वाणिज्य विभाग ने निर्यात से जुड़ी और ड्यूटी में छूट देने वाली योजनाओं की जांच की, जिनमें एडवांस ऑथराइजेशन, ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट ऑथराइजेशन, ड्यूटी ड्रॉबैक, रोडीटीईपी और एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) स्कीम शामिल हैं.

श्रीवास्तव के अनुसार, चुंकि ये लाभ सीधे तौर पर निर्यात प्रदर्शन से जुड़े होते हैं, इसलिए ये काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाए जाने के मामलों में खास तौर पर अधिक संवेदनशील होते हैं.’

एंटी-सब्सिडी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विभाग ने 6 अगस्त को अमेरिकी सोलर निर्माताओं के एक गठबंधन की याचिका पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी की जांच शुरू की थी.

इसके अलावा, भारतीय सरकार और अडानी के अनुरोध पर जांच की अवधि को भी बदला गया. पहले यह अवधि 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 थी, जिसे संशोधित कर 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 कर दिया गया.