कुलीनों के कुनबे में विवाद…प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची शिकायतें

विवादों के कारण कई जिलों की कार्यकारिणी अटकी

भोपाल/मंगल भारत।कुलीनों का कुनबा कहे जाने वाली भाजपा में जिलों की कार्यकारिणी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि कई जिलों की कार्यकारिणी घोषित होने के बाद विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। प्रतिनिधित्व और वर्चस्व को लेकर उठी नाराजगी के चलते कार्यकारिणी होल्ड कर दी गई हैं। यही नहीं कार्यकारिणी में उठे विवाद की शिकायतें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक पहुंच रही हैं। मंत्री-विधायकों के समर्थकों की उपेक्षा के आरोपों ने सियासत का तापमान बढ़ा दिया है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि भाजपा ने अगस्त में हर जिले में ऑब्जर्वर भेजकर वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं से चर्चा की थी। इसके बाद भी ज्यादातर जिला कार्यकारिणी में विवाद सामने आए थे। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या ऑब्जर्वर की रिपोर्ट वास्तविक असंतोष को दर्ज करने में असफल रही, या फिर शीर्ष नेतृत्व स्थानीय दबावों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर पाया। प्रदेश भाजपा ने पिछले साल साल जनवरी में 62 जिला अध्यक्षों का चयन कर दिया था। ग्वालियर, सागर, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन और भोपाल में शहर और ग्रामीण के अलग-अलग जिला अध्यक्ष हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए भाजपा के लिए राजनीतिक नियुक्तियां भी एक चुनौती हैं। निगम, मंडल, बोडों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और जिलों में दीनदयाल अंत्योदय समितियों में पदाधिकारियों की नियुक्तियां होनी हैं। इनकी चर्चा लंबे समय से है, पर अब निर्णय नए अध्यक्ष और सरकार के समन्वय से होना है। इसकी प्रक्रिया कब प्रारंभ होगी और किसे मौका मिलता है, इसमें खंडेलवाल की कार्यशैली दिखाई देगी। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय की गई नियुक्तियों को सीएम डॉ. यादव ने भंग कर दिया था। अब नई नियुक्तियों की तैयारी जारी है और कई बार सूची भी बन चुकी है।
कई जिलों में विवाद की स्थिति
प्रदेश में भाजपा की जिला कार्यकारिणी घोषित होने के बाद विवाद सामने आ रहे हैं। विवादों के चलते कुछ जिला कार्यकारिणी में बदलाव हुआ और इस्तीफे लिए गए। भाजपा की भोपाल जिला कार्यकारिणी को घोषित होते ही विवादों में उलझ गई थी। बढ़ते विवाद के चलते जिला कार्यकारिणी को होल्ड पर डाल दिया था। पिछले दिनों होशंगाबाद और छतरपुर की जिला कार्यकारिणी घोषित हुई है। इसमें भी विवाद सामने आ रहे हैं। विधायक और जन प्रतिनिधियों ने कार्यकारिणी के कुछ पदाधिकारियों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक से शिकायत दर्ज कराई है। अब भोपाल, सागर और नरसिंहपुर की जिला कार्यकारिणी घोषित होना है। गौरतलब है कि भाजपा ने पिछले साल अगस्त में भाजपा जिला कार्यकारिणी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। पहली बार जिला कार्यकारिणी घोषित करने के लिए ऑब्जर्वर की टीम गठित की थी। दो-दो ऑब्जर्वर हर जिले में भेजे गए थे। ऑब्जर्वर को जिलों में जन प्रतिनिधियों से बात कर संभावित नामों की सूची बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। ऑब्जर्वर ने अगस्त में ही सभी जिलों का दौरा कर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को संभावित नामों की सूची सौंपी थी। इसके बाद जिला कार्यकारिणी घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस प्रक्रिया के बाद भी भाजपा की ज्यादातर जिला कार्यकारिणी में विवाद सामने आए थे। मंडला में पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन प्रिया धुर्वे और मंत्री संपतिया उइके की बेटी श्रद्धा उइके की नियुक्ति का विरोध हुआ था। वहीं मऊगंज में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे राहुल गौतम पर सवाल उठा था। इंदौर की जिला कार्यकारिणी को लेकर भी विवाद सामने आया था। इससे साफ होता है कि भाजपा तमाम प्रयासों के बाद भी कार्यकर्ताओं को संतुष्ट नहीं कर पा रही है। इससे कार्यकर्ताओं के भीतर परिवारवाद को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया इतनी तीखी रही थी पदाधिकारियों को इस्तीफे तक देने पड़े थे।