बिहार: भाजपा की शह और मात? सबसे लंबे समय तक सीएम रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की ‘इच्छा’ जताई

बिहार में सरकार का चेहरा बदलने की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक्स पर लिखे एक पोस्ट में राज्यसभा जाने की ‘इच्छा’ ज़ाहिर की है. साथ यह भी घोषणा की कि राज्य में नई सरकार का गठन किया जाएगा.

नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ लेने के चार महीने से भी कम समय बाद, नीतीश कुमार ने गुरुवार (5 मार्च) को घोषणा की है कि राज्य में नई सरकार का गठन किया जाएगा. उन्होंने राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है.

इस बीच पटना में नीतीश कुमार के आवास के बाहर पार्टी समर्थकों के एक वर्ग को विरोध प्रदर्शन करते हुए देखा गया.

यह कदम ऐसे समय आया है जब नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कुल 202 सीटें जीतीं, जबकि नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) को भाजपा से कम 85 सीटों पर सिमटना पड़ा था.

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला ऐसे समय आया है जब बिहार चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए लगातार यह कहता रहा था कि चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जा रहा है. उस समय विपक्ष आरोप लगा रहा था कि यदि एनडीए जीत भी जाता है तब भाजपा नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी. अब जब नीतीश को केंद्र की राजनीति में भेजा जा रहा है, ऐसे में विपक्ष के आरोप सही साबित होते दिख रहे हैं.

भाजपा और जदयू ने पहली बार बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा था. चुनाव नीतीश कुमार की खराब सेहत और भाजपा द्वारा उन्हें किनारे करने की कोशिशों की चर्चा के बीच लड़ा गया था. भाजपा उन्हें एनडीए का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के लिए तैयार नहीं थी, हालांकि पार्टी यह भी मानती थी कि उनके बिना चुनाव लड़ना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा होगा.

चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के साथ कोई संयुक्त रैलियां नहीं की गईं और गठबंधन का घोषणापत्र जारी करने के लिए हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस भी मात्र 26 सेकेंड चली, जिसमें मुख्यमंत्री ने एक शब्द भी नहीं बोला.

नीतीश कुमार को राज्य सरकार से हटाकर राज्यसभा भेजने का यह कदम महाराष्ट्र की स्थिति की भी याद दिलाता है. वहां 2024 के विधानसभा चुनाव तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में लड़े गए थे, लेकिन महायुति गठबंधन की जीत के बाद भाजपा के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बना दिया गया था.

गुरुवार को एक्स पर जारी एक बयान में नीतीश कुमार ने बिहार में सरकार बदलने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि उनकी हमेशा से इच्छा रही है कि वे बिहार विधानसभा और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनकर सेवा करें.
उन्होंने कहा, ‘पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है. आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है. इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं. इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं.’

नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका ‘सहयोग और मार्गदर्शन’ मिलता रहेगा.

उन्होंने कहा, मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा. जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा.’

बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की 89 और जदयू की 85 सीटों के अलावा एनडीए के अन्य घटक दलों में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19 सीटें मिलीं, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को 5 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को 4 सीटें मिलीं थीं.

नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं. वह 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे और 2014-15 के बीच के एक छोटे से अंतराल को छोड़कर तब से राज्य की सत्ता संभालते रहे हैं.