7.37 लाख कुपोषित बच्चों में से आधे भी नहीं उबर पाए

भोपाल/मंगल भारत

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों से अति गंभीर कुपोषित बच्चों की संकलित की गई जानकारी डराने वाली है। वर्ष 2025 में अति गंभीर कुपोषित की श्रेणी में आए सात लाख 37 हजार बच्चों (छह वर्ष तक उम्र के) में से तीन लाख 63 हजार सामान्य नहीं हो पाए हैं। यानी, चिह्नित करने के बाद भी इन्हें कुपोषित की श्रेणी से बाहर नहीं लाया जा सका है।
स्थिति सुधरने की जगह बिगड़ी है: मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत इन्हें चिह्नित किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि स्थिति सुधरने की जगह बिगड़ी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-पांच की 2019 से 2021 के बीच रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 35.7 प्रतिशत बच्चे ठिगनापन (अविकसित) के शिकार थे। वर्ष 2025 में अति गंभीर कुपोषित की श्रेणी में आए सात लाख 37 हजार बच्चों (छह वर्ष तक उम्र के) में से तीन लाख 63 हजार सामान्य नहीं हो पाए हैं। यानी, चिह्नित करने के बाद भी इन्हें कुपोषित की श्रेणी से बाहर नहीं लाया जा सका है।
2017 से नहीं बढ़ी पोषण की राशि: आंगनबाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की दर बीते आठ वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। सामान्य कुपोषित श्रेणी के बच्चे को अब भी मात्र आठ रुपये प्रतिदिन और अति गंभीर कुपोषित बच्चे को 12 रुपये प्रतिदिन की दर से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। अंतिम बार वर्ष 2017 में इन दरों में वृद्धि की गई थी।