दिल्ली दरबार पहुंची… निगम-मंडलों में नियुक्ति की सूची

आलाकमान तय करेगा किसको मिलेगी ‘अध्यक्षी’

मप्र में करीब दो साल के इंतजार के बाद नेताओं को राजनीतिक नियुक्ति की आस जगी है। निगम-मंडल-प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए सूची तैयारी हो गई है। सूत्रों का कहना है कि सत्ता-संगठन ने सूची तैयार करके दिल्ली भेज दी है। अब आलाकमान तय करेगा की किसको अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी मिलेगी। जानकारी के अनुसार, मप्र सरकार 15 मार्च के बाद सरकारी संस्थाओं में राजनीतिक नियुक्तियां शुरू कर सकती है। जानकारों की मानें तो इन पदों पर पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को बैठाने की तैयारी में है, जो पार्टी संगठन की नजर में समर्पित और बेहतर काम करने वाले हैं। कहा जा रहा है कि सूची से सिफारिशी नेताओं के नाम काट दिए गए हैं।
गौरतलब है कि इन दिनों भाजपा राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में व्यस्त है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी बिहार से राज्यसभा प्रत्याशी हैं। इसी दौरान बिहार में भी सत्ता परिवर्तन का दौर चलेगा, जिससे भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व व्यस्त रहेगा। राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा नेतृत्व मध्यप्रदेश के निर्णयों पर गौर करेगा। सूत्रों की मानें तो इसके बाद ही सरकारी संस्थाओं पर राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा। जानकारों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नितिन नबीन की ताजपोशी के बाद प्रदेश के निगम मंडल की सूची नए सिरे से तैयार की गई है। इस सूची को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पार्टी अध्यक्ष के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मंत्रणा हो चुकी है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश के प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह सहित दूसरे नेताओं ने भी सीएम व प्रदेशाध्यक्ष के साथ चर्चा की है। इसके बाद आंशिक संशोधन के बाद सूची को एक बार फिर से दिल्ली भेजा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि 15 मार्च के बाद इन सूचियों पर मुहर लगनी शुरू हो जाएगी और पार्टी को जिन नेताओं को उपकृत करना है, उनके नामों की घोषणा हो जाएगी।
लंबे समय से टल रहा निर्णय
बता दें, कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। कई बार सूची तैयार होने की बात सामने आई, लेकिन अंतिम निर्णय टलता रहा। अब माना जा रहा है कि इसी माह कभी भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूची जारी की जा सकती है। भाजपा बचे हुए मोर्चो की कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी, मंडल पदाधिकारियों, एल्डर मैन समेत अन्य पदों पर नियुक्ति के आदेश जल्द जारी करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी नगरीय निकाय और अन्य चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक संतुलन बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में इन नियुक्तियों को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। उधर, मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी नहीं होगी और इसके लिए करीब दो से तीन महीने का समय लग सकता है।
अप्रैल में होगी मप्र भाजपा की पहली कार्यसमिति बैठक
मप्र भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक अप्रैल में होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित की जा सकती है। ये बैठकें पहले की तरह राज्य के अलग-अलग अंचलों में आयोजित की जाएंगी। पार्टी के जानकारों की मानें तो सरकार भी इन बैठकों के साथ मंत्रिपरिषद की बैठक भी बुला सकती है। इसमें अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। बताया गया है कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद जिला और मंडलों की भी कार्यसमिति बैठक आहुत की जाएगी। इन स्तरों की पहली बैठकें प्रदेश कार्यसमिति के बाद बुलाई जाएगी। लेकिन अगली बार से पहले मंडल और जिला कार्यसमितियों की बैठक होगी और उसके बाद प्रदेश कार्यसमिति की बैठक बुलाई जाएगी। जानकारों की मानें तो प्रदेश संगठन ने तय किया है कि उनके दल के विधायक अपने प्रतिनिधि के तौर पर सीमित लोगों की नियुक्ति कर सकेंगे। इसके लिए प्रदेश संगठन जल्द ही गाइडलाइन जारी करेगा। इसमें विधायक प्रतिनिधि के रुप में उन्हीं कार्यकर्ताओं को पदस्थ किया जाएगा, जो पार्टी के प्रति समर्पण भाव से काफी समय से काम करते आ रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी कार्यकर्ता हो सकते है, जो संघ की पृष्ठभूमि से आते है। बताया गया है कि विधायकों से कहा जाएगा कि वे गाइडलाइन के आधार पर नए सिरे से अपने प्रतिनिधि नियुक्ति करें और उसकी सूचना पार्टी मुख्यालय को भी दी जाये।
राज्यसभा के लिए नाम पर होगा मंथन
सूत्रों की मानें तो प्रदेश भाजपा मध्यप्रदेश से राज्यसभा की खाली हो रहीं दो सीटों के लिए अपने संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी जल्द मंथन कर सकती है। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल अप्रैल माह में समाप्त हो रहा है, जबकि केंद्रीय राज्य मंत्री का कार्यकाल जून माह में समाप्त होगा। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर ये दोनों सीटें भाजपा को मिलना तय है