मध्यप्रदेश में शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

अब ऑनलाइन चलेंगी शस्त्र लाइसेंस की फाइलें

भोपाल/मंगल भारत। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के परिपालन में मप्र सरकार ने शस्त्रों को लेकर सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। गृह मंत्रालय ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि एक मार्च से प्रदेश में किसी भी तरह के नवीन शस्त्र लाइसेंस और नवीनीकरण से जुड़ी फाइलें ऑनलाइन ही चलेंगी। साथ ही मौजूदा स्थिति में जिन शस्त्रधारियों ने अपने-अपने शस्त्रों की विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) नहीं ली हैं, उन्हें 20 मार्च तक की और मोहलत दी गई है। हालांकि प्रदेश में करीब 2 लाख 30 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस ऐसे हैं, जिनकी विशिष्ट पहचान संख्या ही नहीं है। है। दरअसल, केंद्रीय केंद्रीय गृह गृह मंत्रालय के आयुध नियम 2006 के नियम 15 के तहत देश में बिना विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) वाले शस्त्र अवैध माने जाएंगे। इस अधिनियम के परिपालन में शस्त्रों के यूआईएन नंबर जारी करने के संबंध में गृह विभाग ने कलेक्टरों को बीच-बीच में निर्देशित किया जाता रहा है, लेकिन ज्यादातर कलेक्टर की इसमें रुचि नहीं ली। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्रालय की समीक्षा रिपोर्ट में शस्त्रों के यूआईएन नंबर जारी करने में मप्र की स्थिति बेहद खराब है। इस संबंध में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने पिछले महीने 19 फरवरी को समीक्षा बैठक में शस्त्रों के यूआईएन की जानकारी ली। समीक्षा बैठक में तय हुआ कि एक मार्च से प्रदेश में शस्त्र के नए लाइसेंस एवं नवीनीकरण की कार्यवाही ऑनलाइन चलेंगी। गृह विभाग के सचिव कृष्णावेणी देशावतु ने आयुध नियम का पालन कराने के संबंध में सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं।
वैधानिक तौर पर अवैध घोषित हो सकते हैं शस्त्र
आयुध नियम के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय का जोर सभी शस्त्रों की जानकारी एनडीएएल-एलाइस पोर्टल पर अपडेट करने और नए लाइसेंस के प्रकरण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन चलाने पर है। बीच-बीच में इसके निर्देश जारी किए गए है, लेकिन जिला स्तर पर इसको गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि नागरिक सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए सरकार एक झटके में बिना यूआईएन नंबर वाले शस्त्रों को अवैध घोषित कर सकती है। हालांकि इसके लिए एक और मोहलत दे दी गई है।