भोपाल/मंगल भारत

मध्य प्रदेश में हर घंटे औसतन 8 साइबर क्राइम के मामले दर्ज हो रहे हैं। अगर हिसाब लगाया जाए तो रोज लगभग 190 लोग साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। 2025 में पहले छह महीनों में ही कुल 34021 साइबर अपराध के केस सामने आए हैं, जबकि यह आंकड़ा 2021 के मुकाबले कई गुना ज्यादा है, जब पूरे साल में सिर्फ 13768 मामले दर्ज हुए थे। साल 2021 से 2025 तक का साइबर ठगी का ग्राफ अब आसमान छू रहा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 2022 में 26053, 2023 में 52846 और 2024 में 68,578 मामले सामने आए थे। 2025 में जनवरी से जून माह तक ही 34,021 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जो साल के अंत के फाइनल आंकड़ों में 70 हजार से अधिक हो सकती हैं। ये वे मामले हैं जिनकी जानकारी केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से दी गई है।
गिने-चुने लोगों को ही वापस मिलती है ठगी की रकम
राज्यसभा में पेश किए गए इन आंकड़ों के अनुसार ये मामले मुख्य रूप से फिशिंग, ओटीपी स्कैम, फर्जी जॉब ऑफर, शेयर मार्केट, निवेश घोटाले, डिजिटल अरेस्ट और सोशल मीडिया पर होने वाले अन्य फर्जीवाड़ों से जुड़े हैं। पुलिस के अनुसार इस तरह के मामले प्रदेश के महानगरों भोपाल-इंदौर से लेकर छोटे कस्बों तक तेजी से सामने आ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस इन मामलों को सुलझाने में जूझ रही है। राज्य साइबर सेल में इस तरह के अपराधों की जांच करने वाले ट्रेंड अधिकारी बहुत कम हैं। स्टेट साइबर सेल के साथ ही जिलों की साइबर सेल में भी केवल डिजिटल और साइबर स्कैम की जांच करने वाले अफसरों की संख्या 500 से भी कम है. ऐसे में यही अधिकारी हजारों शिकायतों की जांच का बोझ उठा रहे हैं। इन मामलों में सबसे ज्यादा मुश्किल तब आती है जब ठगी को अंजाम देने वाला गिरोह अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय होता है। ऐसे में उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। एमपी में साइबर फ्रॉड सकी रिकवरी की स्थिति भी दयनीय है। यहां केवल गिने-चुने लोगों को ही ठगी की रकम वापस मिल पाती है।
एडवाइजरी के भरोसे पुलिस, नए तरीके अपना रहे ठग
इस तरह के लगातार बढ़ते मामलों के बाद पुलिस हर बार एक एडवाइजरी जारी कर देती है। इसमें लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने के उपाय गिना दिए जाते हैं। पुलिस हर बार अपनी एडवाइजरी में दावा करती है कि वे कभी भी ओटीपी, बैंक डिटेल्स या यूपीआई पिन किसी से शेयर न करें। इसके अलावा अनजान लिंक पर क्लिक न करने, फर्जी कॉल्स और वीडियो कॉल्स से सावधान रहने और किसी भी तरह का शक या ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 और साइबर क्राइम वेबसाइट पर शिकायतें दर्ज करने की सलाह देती है। हालांकि एक हकीकत यह भी है कि व्ग हर थोड़े से अंतराल के बाद लोगों को झांसा देने में सफल हो जाते हैं।