बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने उत्तराखंड में अपने प्रशासन के अधीन आने वाले 47 मंदिरों में ‘ग़ैर-सनातनी’ लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मंदिर प्रशासन यह कैसे तय करेगा कि कोई व्यक्ति सनातन धर्म का अनुयायी है या नहीं.

नई दिल्ली: बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने उत्तराखंड में अपने प्रशासन के अधीन आने वाले 47 मंदिरों में उन लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है जो सनातन धर्म का पालन नहीं करते. इन मंदिरों में बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर भी शामिल हैं.
समुद्र तल से लगभग 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित ये दोनों मंदिर चारधाम तीर्थ यात्रा का हिस्सा हैं. बताया जाता है कि उत्तराखंड में सबसे अधिक श्रद्धालुओं जिन तीर्थ स्थलों में पहुंचते हैं, यह दोनों मंदिर उनमें शामिल हैं. राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा धार्मिक पर्यटन पर निर्भर करता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस प्रस्ताव को देहरादून स्थित समिति के कार्यालय में आयोजित बजट बैठक के दौरान मंज़ूरी दी. यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास के मुख्य परिसर में लागू होगा.
द्विवेदी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चारधाम के मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की सनातन धर्म में आस्था हो. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मंदिर प्रशासन यह कैसे तय करेगा कि कोई व्यक्ति सनातन धर्म का अनुयायी है या नहीं.
द हिंदू से बात करते हुए द्विवेदी ने कहा कि समिति ने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है. जब उनसे पूछा गया कि ‘सनातनी’ से उनका क्या मतलब है, तो द्विवेदी ने कहा, ‘जो कोई भी सनातन धर्म में विश्वास रखता है, वह सनातनी है.’
जब उनसे आगे पूछा गया कि यदि कोई मुस्लिम सनातन धर्म में आस्था रखता हो, तो क्या उसे मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा, तो उन्होंने उल्टा सवाल किया कि, ‘क्या किसी हिंदू को मक्का-मदीना जाने की अनुमति है?’
उन्होंने यह भी कहा, ‘जो व्यक्ति माथे पर तिलक लगाता है, मंत्रों का जाप करता है, चालीसा का पाठ करता है और श्री बद्री-केदार में आस्था रखता है, वही सनातनी है.’
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, द्विवेदी ने जनवरी में इशारा किया था कि कमेटी चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं की प्रवेश को सीमित करने की संभावना तलाश सकती है.
उसी मीटिंग में समिति ने आने वाली चारधाम यात्रा से जुड़ी तैयारियों के लिए लगभग 121 करोड़ रुपये के बजट को मंज़ूरी दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस रकम में से बद्रीनाथ धाम के लिए 57.5 करोड़ रुपये और केदारनाथ धाम के लिए 63.6 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
समिति ने तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष बनाने का भी फैसला किया है, जिसका उद्देश्य तीर्थ यात्रा से जुड़े पुजारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है. इस कोष के माध्यम से तीर्थ पुरोहितों को आर्थिक सहायता और अन्य सहयोग प्रदान किया जाएगा.
2026 की तीर्थयात्रा के लिए केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खुलने वाले हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगोत्री मंदिर और यमुनोत्री मंदिर के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के मौके पर खुलेंगे.