ओडिशा: चिट फंड घोटाला मामले में सीबीआई चार्जशीट के बाद पूर्व सांसद बीजद छोड़ भाजपा में शामिल हुए

पूर्व सांसद और बीजद नेता रबींद्र कुमार जेना 12 मार्च को होने वाली सीबीआई की अदालती सुनवाई से एक दिन पहले बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए. सीबीआई ने ओडिशा के सीशोर चिट फंड घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में जेना के खिलाफ चार्जशीट दायर की है.

नई दिल्ली: बालासोर के पूर्व सांसद और बीजू जनता दल (बीजद) के नेता रबींद्र कुमार जेना बुधवार (11 मार्च) को ओडिशा की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक रूप से शामिल हो गए.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रबींद्र कुमार जेना ने अपने समर्थकों के साथ भुवनेश्वर स्थित भाजपा के राज्य मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

उल्लेखनीय है कि जेना गुरुवार (12 मार्च) को होने वाली सीबीआई की अदालती सुनवाई से एक दिन पहले बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए. सीबीआई ने ओडिशा के सीशोर चिट फंड घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में जेना के खिलाफ चार्जशीट दायर की है.

जेना ने भाजपा की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में पार्टी में शामिल होने के बाद कहा, “भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो ओडिशा के साथ-साथ भारत का भी विकास कर सकती है.”

इससे पहले मंगलवार (10 मार्च) को रबींद्र कुमार जेना ने पार्टी प्रमुख नवीन पटनायक को लिखे पत्र में ‘निजी कारणों और वर्तमान परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए बीजद की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

बता दें कि 2014 में जेना ने बीजद के टिकट पर बालासोर लोकसभा सीट जीती थी. पांच साल बाद 2019 के चुनाव में वे भाजपा के प्रताप सारंगी से यह सीट हार गए थे.

इसके बाद 2024 में उन्हें आम चुनाव में पार्टी का टिकट नहीं दिया गया.

हालांकि, बीजद ने उनकी पत्नी सुबासिनी जेना, जो बास्ता से मौजूदा बीजद विधायक हैं, को 2024 के विधानसभा चुनाव में फिर से उसी सीट से उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बिजन नायक को 20,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया था.

अखबार के अनुसार, जेना के साथ-साथ बास्ता और बालासोर ब्लॉक के अध्यक्ष और जिले के छह जिला परिषद सदस्य भी भाजपा में शामिल हो गए हैं.

रबींद्र कुमार जेना ने कहा कि वे बीजद सुप्रीमो पटनायक का बहुत सम्मान करते हैं. लेकिन अगली पीढ़ी के नेताओं को कमान सौंपे बिना कोई क्षेत्रीय पार्टी टिक नहीं सकती.

जेना ने आगे कहा कि उन्होंने कई बार बीजद नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

गौरतलब है कि अप्रैल 2024 की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2014 से विपक्षी दलों से जुड़े 25 नेता, जो केंद्रीय एजेंसी की जांच के दायरे में थे, वो भाजपा में शामिल हो गए. इससे भी दिलचस्प बात यह है कि इन 25 में से 23 नेताओं को उन मामलों में राहत मिल चुकी है, जिनमें वे जांच का सामना कर रहे थे. जबकि तीन नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं और अन्य 20 में जांच रुकी हुई है या ठंडे बस्ते में हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि इस सूची में छह ऐसे नेता शामिल हैं, जो आम चुनाव से कुछ हफ्ते पहले अपनी पार्टी को छोड़कर भाजपा में चले गए. ऐसे में विपक्ष अक्सर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और नेताओं के दल-बदल के लिए भाजपा को निशाने पर लेता रहा है