नियम लागू किए… सीबीएसई में ‘मुन्नाभाई’ को देनी होगी दोबारा परीक्षा

नियम लागू किए… सीबीएसई में ‘मुन्नाभाई’ को देनी होगी दोबारा परीक्षा

सीबीएसई यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड अब छात्रों को छठे या 7वें अतिरिक्त विषय के आधार पर पास नहीं करेगा। बोर्ड ने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नए नियम लागू किए हैं। ये नियम खास तौर से उन स्टूडेंट्स के लिए है, जो परीक्षा के दौरान नकल या किसी अनुचित व्यवहार की वजह से बाहर कर दिए गए हों। ऐसे स्टूडेंट्स को दोबारा परीक्षा देनी होगी। सीबीएसई के नए नियमों के अनुसार अब स्टूडेंट्स को पास होने के लिए अपने मेन सब्जेक्ट में ही निर्धारित मार्क्स हासिल करने होंगे। अगर किसी छात्र का किसी विषय का रिजल्ट अनुचित साधनों या अन्य कारणों से रोका जाता है, तो उसे एडिशनल सब्जेक्ट के मार्क्स के आधार पर पास नहीं माना जाएगा। सीबीएसई के पुराने नियमों के अनुसार, अगर कोई स्टूडेंट किसी मेन सब्जेक्ट में मिनिमम मार्क्स हासिल नहीं कर पाता था, लेकिन उसने एडिशनल सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स पाए होते थे, तो उस सब्जेक्ट के आधार पर उसे पास किया जा सकता था। अब बोर्ड ने इस व्यवस्था को खत्म करने का फैसला लिया है। बोर्ड के अनुसार, कुछ मामलों में छात्र एडिशनल सब्जेक्ट के सहारे पास हो रहे थे, जिससे एग्जाम सिस्टम की निष्पक्षता प्रभावित हो रही थी।

सुको के जज बोले- एआई मददगार पर अनुशासित फैसले लेने के काबिल नहीं
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने शनिवार को कहा कि एआई वकील के प्रशिक्षित दिमाग और जज की नैतिक जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकता। अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो एआई समय बचा सकता है और कानूनी काम के कुछ पहलुओं को ज्यादा आसान बना सकता है। जस्टिस विक्रम तेलंगाना में एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। जस्टिस नाथ ने कहा कि टेक्नोलॉजी किसी नोट का ड्राफ्ट बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे कानून बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि एआई के गलत इस्तेमाल की वजह से न्यायिक व्यवस्था को इस हद तक नहीं जाना चाहिए कि वह इससे पूरी तरह से दूरी बना ले। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि एआई महज एक टूल है, और एक टूल को टूल ही रहना चाहिए। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज, सतीश चंद्र शर्मा और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य जज, जस्टिस अपारेष कुमार सिंह ने भी बात रखी। एआई के गलत इस्तेमाल के कारण इसे पूरी तरह से छोड़ देना भी सही नहीं है। इसका समाधान है जानकारी के साथ इस्तेमाल, नैतिक अनुशासन और पेशेवर मानकों का पालन। लोगों को एआई का उपयोग सावधानी और इसकी सीमाओं को समझकर करना चाहिए। नई टेक्नोलॉजी कानूनी काम को आसान बना सकती है, लेकिन लापरवाही के नए रूप भी पैदा कर सकती है।

साजिश बेनकाब! यूपी में छह गद्दार गिरफ्तार, वीडियो भेजते थे विदेश
यूपी स्थित गाजियाबाद के मसूरी थाना पुलिस के बाद अब कौशांबी पुलिस के हत्थे छह संदिग्ध चढ़े हैं। सभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के ठिकानों की लोकेशन और उनकी वीडियो व फोटो विदेश भेजने का काम कर रहे थे। इसके लिए उन्हें रुपए मिल रहे थे। गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान सुहेल मलिक उर्फ रोमियो बिजनौर, साने इरम उर्फ महक संभल, प्रवीन कौशांबी, राज वाल्मिकी औरैया, शिवा वाल्मीकि बदायूं और रितिक गंगवार- शाहजहांपुर के रूप में हुई है। पूछताछ में सभी आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वह योजनाबद्ध तरीके से फोन पर चैट के जरिए विदेशी लोगों से संपर्क में थे। पकड़े गए आरोपियों में मुख्यारोपी बिजनौर के नरवदी नवाड़ा का रहने वाला सुहेल मलिक उर्फ रोमियो है।

ट्रंप की करीबी बोलीं- दुनिया को पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात आतंकवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और धुर-दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता लौरा लूमर ने कहा है कि दुनिया को पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात इस्लामी आतंकवाद है। लौरा लूमर ने सुझाव दिया कि अमेरिका को पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के साथ बिल्कुल भी गलबहियां नहीं करनी चाहिए। लौरा ने जिहाद फैलाने के लिए पाकिस्तान को खुले तौर पर लताड़ा। भारत और ब्रिटेन में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े थे। लौरा लूमर ने कहा-पाकिस्तान एक खुले तौर पर जिहादी और शरिया-समर्थक देश के तौर पर काम करता है, और जब आप दुनिया भर में हुए कई इस्लामी आतंकी हमलों को देखते हैं, तो अक्सर उनका कोई न कोई तार पाकिस्तान से जुड़ा होता है।