बजट सत्र के पहले चरण में निलंबित किए गए विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन रद्द

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.
नई दिल्ली: लोकसभा ने मंगलवार (17 मार्च) को विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन ध्वनि मत से रद्द कर दिया. अब ये सभी सांसद संसद के बजट सत्र में हिस्सा ले सकेंगे.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक के सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया. इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा, जिसका समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव और राष्ट्रीय कम्युनिस्ट पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने समर्थन किया.

इसके बाद स्पीकर ओम बिरला द्वारा इसे सदन की सहमति के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई.
गौरतलब है कि बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को सदन की अवमानना और अनुशासनहीनता के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों- सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था.

निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं. निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे.

बताया जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी.

सभी 8 सांसदों का निलंबन रद्द होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं कि यह रद्द हो गया है. गरिमा दोनों पक्षों की ओर से बनी रहनी चाहिए.
गौरतलब है कि यह विवाद कारवां पत्रिका में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर आधारित लेख की सामग्री से जुड़ा हुआ है, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख के उस विवरण का जिक्र है, जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि 2020 में भारत और चीन के बीच टकराव के दौरान राजनीतिक नेतृत्व अनिर्णायक प्रतीत हुआ था.

बीते 3 फरवरी को सदन में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस संबंध में कारवां पत्रिका के लेख का हवाला देने की कोशिश की थी, जिस पर सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई थी. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर हंगामा हुआ था और उनको भाषण पूरा नहीं करने दिया गया था. उसी दौरान सांसदों के निलंबित किया गया था.