पूर्व मंत्रियों को किया जा सकता है एडजस्ट

नवरात्र शुरू होने के साथ कभी भी आ सकती है लिस्ट

भोपाल/मंगल भारत। मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ लेने का सपना संजोए कुछ दावेदारों के सपने टूट भी सकते हैं। भाजपा नेतृत्व कुछ पूर्व मंत्री और कांग्रेस से आकर चुनाव जीतने वाले विधायकों को निगम-मंडल में भी तैनात कर सकता है। दरअसल, कई वरिष्ठ नेताओं को वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद कैबिनेट में नहीं लिया गया था। ऐसे नेताओं को भरोसा था कि मंत्रिमंडल विस्तार होने पर उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। इस बीच नेतृत्व ने निर्णय लिया कि ऐसे नेताओं को निगम-मंडल में अध्यक्ष बनाया जाए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई बार टलते-टलते अब निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सही समय आ गया है। चैत्र नवरात्र आरंभ होने के बाद कभी भी सूची जारी की जा सकती है।
किन्हें मिल सकती है जगह
भाजपा नेतृत्व उन वरिष्ठ विधायकों और पूर्व मंत्रियों को निगम-मंडलों का अध्यक्ष बना सकता है, जिन्हें 2023 के चुनाव के बाद कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई थी। इसमें कांग्रेस से आए कुछ विधायक भी शामिल हो सकते हैं। गोपाल भार्गव, मालिनी, लक्ष्मण सिंह गौड़, बृजेंद्र सिंह यादव, अजय विश्नोई, अर्चना चिटनीस सहित कई नाम चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ चर्चा भी की है ताकि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधा जा सके।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। पार्टी नेतृत्व 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पुराने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ विधायकों और पूर्व मंत्रियों को इन पदों पर एडजस्ट करने की तैयारी है ताकि पार्टी के भीतर किसी भी असंतोष को रोका जा सके।
इन आयोग में भी अध्यक्ष नहीं
राज्य महिला आयोग: यह आयोग लंबे समय से बिना अध्यक्ष के है। पिछली नियुक्तियों को लेकर हुए विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण यहां पद रिक्त बने हुए हैं, जिससे हजारों मामले लंबित हैं।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग: इन दोनों महत्वपूर्ण आयोगों में भी अध्यक्ष और सदस्यों के पद वर्तमान
में रिक्त हैं।
पिछड़ा वर्ग आयोग: यहां भी नियुक्तियों की प्रक्रिया लंबित है और सरकार जल्द ही नए नामों की घोषणा कर सकती है।
अल्पसंख्यक आयोग: इस आयोग में भी वर्तमान में नेतृत्व (अध्यक्ष) का अभाव है।