स्कूलों में कंप्यूटर खरीदी और मेंटेनेंस के नाम पर घोटाला

मंत्री की नाराजगी के बाद कलेक्टरों को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी

भोपाल/मंगल भारत। मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा पिछले तीन वर्षों में जारी किए गए टेंडरों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2023 से 2025 के बीच कंप्यूटर, यूपीएस और इंटरैक्टिव बोर्ड की खरीद में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। इस बीच प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीदी और मेंटनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। स्कूलों में कंप्यूटर खरीदी और मेंटनेंस के नाम पर हुए घोटाले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त लोक शिक्षण ने कलेक्टरों को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीदी और मेंटनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। विभागीय मंत्री ने इस मामले को लेकर नाराजगी जाहिर की है। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने एक पत्र सभी जिलों के कलेक्टर को लिखा है कि वे बीते 3 साल में हुए कामों की जांच करके प्रतिवेदन भेजें। इसमें तीन साल के भीतर जो भी बजट आवंटित हुआ है और उसमें जो निर्माण कार्य हुए हैं, उनकी पूरी जांच करना है। हालांकि इसमें इंटरएक्टिव पैनल के मामले को शामिल नहीं किया है, जबकि इसको लेकर भी कई शिकायतें विभागीय मंत्री और अफसरों को हो चुकी हैं। जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।
कलेक्टरों ने बनाई जांच कमेटी
उधर, जिलों में इस पत्र के बाद कलेक्टरों की तरफ से जांच कमेटी बनाई जा रही है, जो कि कलेक्टरों की निगरानी में ही पूरे मामले की जांच करेगी। दरअसल, मप्र में तीन साल में स्कूलों में जमकर मेंटनेंस काम हुआ है। बीते साल ही करीब 149 करोड़ रुपए स्कूलों में मेंटनेंस के लिए भेजे गए थे, लेकिन इसके लिए भोपाल की ही फर्म को काम दे दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी को बायपास करके बीईओ और प्राचार्य स्तर पर काम कराया गया। रीवा, मैहर और सतना जिले में बिना काम के भुगतान करने का मामला सामने आया। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद यह मामला विधानसभा में उठाया गया और मंत्री ने इसमें जांच के निर्देश दिए।
अभी तक तीन पर गिरी गाज
हालांकि इस पूरे मामले में मंत्री उदय प्रताप सिंह के निर्देश के बाद तीन अफसरों को हटाने की कार्रवाई कर दी गई है। इनमें डीएस कुशवाह संचालक लोक शिक्षण को सीमेट (राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान) का संचालक बनाकर भेजा गया है। वहीं प्रमोद कुमार सिंह सीमेट को लोक शिक्षण में संचालक बनाया गया है। साथ ही विभाग में उप सचिव बनाया गया है। इसके अलावा पीके सिंह बघेल जो कि उप संचालक लोक शिक्षण थे को राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थ किया गया है। गौरतलब है कि विभागीय मंत्री ने आईएएएस अफसर की निगरानी में कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे, लेकिन फिलहाल इस समिति को बनाने का मामला होल्ड हो गया है। कमाल की बात यह है कि इस पूरे मामले में वित्तीय स्वीकृति देने वाले लोक शिक्षण संचालनालय के वित्त अधिकारी राजेश मोर्य व उन फर्म से सवाल-जवाब नहीं हुए, जिनके ऊपर बिना काम किए भुगतान लेने के आरोप हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि कलेक्टरों की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में कुछ आगे होगा।