पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है, जहां ट्रंप के ईरान से बातचीत के दावे को तेहरान ने ख़ारिज कर दिया है. इज़रायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई, अमेरिका की धमकियां और कूटनीतिक अविश्वास ने हालात को और जटिल बना दिया है.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत का दावा किया है, वहीं ईरानी नेतृत्व ने ऐसे किसी भी प्रत्यक्ष संवाद से साफ इनकार किया है.
इस बीच इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई और अमेरिका की कड़ी चेतावनियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है.
बातचीत के दावे पर टकराव
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ के साथ बातचीत कर रहा है. हालांकि, क़ालिबाफ ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका ‘अपनी इच्छाओं को खबर के रूप में पेश कर रहा है’ और साथ ही ईरान को धमका भी रहा है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने भी स्पष्ट किया कि कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है, हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि कुछ प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए भेजे गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हाल के महीनों में कूटनीति के साथ हुए ‘विश्वासघात’ को नहीं भूला है.
अमेरिका की सख्त चेतावनी
ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे डीसैलिनेशन प्लांट्स, को व्यापक रूप से नष्ट कर सकता है. इस बयान ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है.
इजरायल की सैन्य कार्रवाई और बढ़ते खतरे
इसी दौरान इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य घुसपैठ शुरू कर दी है. इजरायली अधिकारियों के संकेतों से यह आशंका जताई जा रही है कि यह अभियान लंबा खिंच सकता है और संभावित रूप से स्थायी कब्जे में बदल सकता है.
इससे पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में संघर्ष के और फैलने का खतरा बढ़ गया है.
अमेरिकी बयान और विवाद
ह्वाइट हाउस से जुड़ी करोलाइन लीविट ने दावा किया कि ‘ईरान के कुछ पूर्व नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अमेरिका से झूठ बोला था.’
इस बयान ने भी कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसे आक्रामक नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
नाटो सहयोगियों में भी मतभेद
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नाटो सहयोगियों, खासकर स्पेन, पर आरोप लगाया कि उन्होंने संकट के समय अमेरिका का साथ नहीं दिया. उन्होंने कहा कि स्पेन ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई में शामिल अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी.
समुद्री क्षेत्र में भी घटना
दुबई के पास समुद्री क्षेत्र में एक कुवैती तेल टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई. हालांकि सभी 24 चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. यह हमला क्षेत्र में बढ़ते असुरक्षा के माहौल की ओर इशारा करता है.
संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हमले की निंदा
भारत ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है. पिछले 24 घंटों में दो अलग-अलग घटनाओं में तीन इंडोनेशियाई शांति सैनिकों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हुए हैं.
भारत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
धार्मिक नेताओं की शांति अपील
तनावपूर्ण माहौल के बीच दलाई लामा ने पोप लियो द्वारा की गई शांति की अपील का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख धर्मों का मूल संदेश प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और आत्म-अनुशासन है, और हिंसा का त्याग ही आगे का रास्ता है.
इन तमाम घटनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में हालात तेजी से जटिल होते जा रहे हैं. कूटनीतिक प्रयासों पर अविश्वास, सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी और वैश्विक शक्तियों के बीच मतभेद, ये सभी संकेत देते हैं कि क्षेत्र में स्थिरता फिलहाल दूर की बात है.