अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रुपया 95 के सबसे निचले स्तर पर, वित्त मंत्री बोलीं- बिल्कुल ठीक चल रहा है

आरबीआई द्वारा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए क़दम उठाए जाने के बावजूद रुपया सोमवार को पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. लोकसभा में विपक्ष द्वारा रुपये की गिरावट का मुद्दा उठाए जाने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया ठीक चल रहा है.

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जाने के बावजूद रुपया सोमवार (31 मंगलवार) को पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर से नीचे फिसल कर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया.

सोमवार को रुपये में 0.3% की गिरावट दर्ज की गई और यह 95.20 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. वैश्विक कारणों और लगातार विदेशी पूंजी के बाहर जाने के दबाव के चलते रुपये पर दबाव बना रहा.

बैंकों की विदेशी मुद्रा पोज़िशन पर सीमा सख्त करने के आरबीआई के कदम से रुपये को केवल थोड़े समय के लिए सहारा मिला. विश्लेषकों का कहना है कि रुपये के लिए मूलभूत स्थितियां अभी भी अनुकूल नहीं हैं.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में ऐतिहासिक बिकवाली दर्ज की और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों से करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये (12.7 अरब डॉलर) निकाल लिए.

एफपीआई ने फरवरी में तीन महीने बाद निवेश बढ़ाया था, लेकिन मार्च में युद्ध शुरू होने के बाद तेज निकासी के चलते उन्होंने 2026 में अब तक कुल 1.31 लाख करोड़ रुपये (14.2 अरब डॉलर) के शेयर बेच दिए हैं. इस दौरान निफ्टी 50 और सेंसेक्स में करीब 14-16% की गिरावट आई है. हालांकि, एलआईसी और म्यूचुअल फंड्स के नेतृत्व में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक बाजार को सहारा दिया और महीने के दौरान भारतीय शेयरों में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया.

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 9.88 प्रतिशत गिरा

भारतीय रुपया वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 9.88 प्रतिशत गिरा है, जो पिछले 14 वर्षों में डॉलर के मुकाबले सबसे बड़ी गिरावट है.

डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक, इससे पहले, वित्त वर्ष 2011-12 में भी घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले 12.4 प्रतिशत गिर गई थी, उस समय चालू खाते का घाटा बढ़कर 4.2 प्रतिशत तक पहुंच गया था.

वहीं, जापान के एक बैंक एमयूएफजी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, रुपये की गिरावट भारत के नजरिये से एक अधिक चिंताजनक संकेत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही सबसे बड़ा वैश्विक झटका, तेल की कीमतें, युद्ध से पहले के स्तर पर स्थिर हो जाएं, फिर भी डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर बना रहेगा.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम भारतीय रुपये को कमजोर स्थिति में देखते हैं, और यदि ईरान तथा पश्चिम एशिया का संघर्ष जारी रहता है और हॉर्मुज़ जलडमरू मध्य बंद रहता है, तो डॉलर-रुपया विनिमय दर 95 के स्तर से भी ऊपर जा सकती है.’

‘रुपया बिल्कुल ठीक चल रहा है-‘ सीतारमण
लोकसभा में विपक्षी सदस्यों द्वारा रुपये की गिरावट का मुद्दा उठाए जाने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत है.

वित्त मंत्री ने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, हमारी वित्तीय स्थिति मजबूत है और पूरी दुनिया हमारे राजकोषीय घाटे के प्रबंधन की सराहना कर रही है. हमारे विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया ठीक चल रहा है, बिल्कुल ठीक चल रहा है.’

वहीं, लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में निर्मला सीतारमण ने कहा कि रुपये की गिरावट सिर्फ भारतीय मुद्रा तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि इस अवधि में कई प्रमुख एशियाई मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं.

उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरियाई वॉन, थाई बहत और फिलीपींस पेसो में क्रमशः 4.6%, 5.5% और 4.8% की गिरावट आई है, जो रुपये की तुलना में अधिक है.

‘पीएम मोदी कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं’ राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुपये की गिरावट और आर्थिक हालात को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रुपया 95 से 100 की ओर बढ़ रहा है, शेयर बाजार गिर रहा है, अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है, नौकरियां खत्म हो रही हैं, आय घट रही है और लोगों की बचत खत्म हो रही है, जबकि रसोई गैस सिलेंडर भी उपलब्ध नहीं हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कारण यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं और खुद को तथा अपनी वित्तीय व्यवस्था को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.