अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध 38वें दिन और हिंसक हो गया है. तेहरान और बेरूत में हमलों से नागरिक हताहत बढ़े हैं. ट्रंप की नई धमकियों ने तनाव बढ़ाया है. इस युद्ध के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति और कीमतों को लेकर आम लोगों की चिंता गहराती जा रही है.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध सोमवार को 38वें दिन में प्रवेश कर गया है. यह संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके मानवीय, आर्थिक और क्षेत्रीय असर लगातार गहराते जा रहे हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर तीखी और अपमानजनक भाषा में धमकी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान ने तय समयसीमा तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा नहीं खोला, तो मंगलवार ‘पावर प्लांट डे और ब्रिज डे’ होगा, संकेत देते हुए कि ईरान के अहम ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है.
यह युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था. तब से अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आई है, समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हुए हैं और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है.
लेबनान में रिहायशी इलाके पर हमला
इस बीच, लेबनान की राजधानी बेरूत में एक रिहायशी इलाके पर हुए हमले ने चिंता और बढ़ा दी है. अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ) के अनुसार, ज्नाह इलाके में हुआ हमला घनी आबादी वाले क्षेत्र में हुआ, जो रफ़ीक हरीरी पब्लिक अस्पताल से कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित है.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बिना किसी चेतावनी के हुए इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए. अस्पताल में तैनात एमएसएफ की मेडिकल कोऑर्डिनेटर लूना हम्माद ने बताया कि कई बुजुर्ग और किशोर गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिनमें सिर, सीने और पेट में गहरी चोटें शामिल हैं. संगठन ने चेतावनी दी है कि अस्पतालों के पास हमले होने से लोगों में भय फैलता है और वे इलाज के लिए आने से कतराने लगते हैं.
तेहरान में विश्वविद्यालय और रिहायशी इलाकों पर हमले
ईरान की राजधानी तेहरान में सोमवार सुबह हवाई हमले किए गए, जिनमें प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को निशाना बनाया गया. ईरानी मीडिया के अनुसार, हमले में विश्वविद्यालय परिसर की इमारतों और पास के गैस वितरण केंद्र को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमले का सटीक लक्ष्य क्या था. युद्ध के चलते विश्वविद्यालय पहले ही खाली कराया जा चुका था और कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं.
इसी तरह तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस्लामशहर में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत की खबर है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस इमारत को क्यों निशाना बनाया गया. इन हमलों की जिम्मेदारी न तो अमेरिका ने ली है और न ही इज़रायल ने, लेकिन ये घटनाएं ट्रंप की ताजा धमकियों के बाद सामने आई हैं.
एक दिन में कई शहरों पर हमले
रविवार से सोमवार के बीच ईरान के कई शहर (अहवाज़, बंदर लेंगेह, करज और शिराज़) हमलों की चपेट में आए. बंदर लेंगेह और कोंग में हुए हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत और 17 के घायल होने की खबर है. वहीं, तेहरान के एक अन्य इलाके में एक घर पर हमले में तीन लोगों की जान गई.
भारत में असर: एलपीजी संकट और सख्ती
इस युद्ध का असर भारत में भी महसूस किया जा रहा है. ईंधन आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, खासकर रसोई गैस (एलपीजी) को लेकर आम लोगों में असुरक्षा बनी हुई है.
इसी बीच दिल्ली में प्रशासन ने एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री को लेकर सख्ती बढ़ा दी है. गोदामों से सीधे सिलेंडर बेचने पर रोक लगा दी गई है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. तेल विपणन कंपनियों ने भी वितरकों को साफ निर्देश दिए हैं कि भंडारण स्थलों से सीधे बिक्री गैरकानूनी है.
व्यापक होता संकट
पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले चुका है, जिसके असर सीमाओं से बाहर तक महसूस किए जा रहे हैं. लगातार बढ़ते हमले, नागरिक इलाकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं और वैश्विक आपूर्ति तंत्र पर पड़ता असर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि हालात फिलहाल थमने के बजाय और जटिल होते जा रहे हैं.