पुलिस के अनुसार, घटना दिमनी पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले रनपुर गांव के पास नेशनल हाईवे-552 पर हुई. उस समय वन विभाग के चार कर्मचारी गश्त के दौरान रेत से भरे एक ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश कर रहे थे, जो चंबल नदी से निकाली गई रेत ले जा रहा था. चालक के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िले में बुधवार (8 अप्रैल) को जब वन विभाग की एक टीम गश्त कर रही थी, तो अवैध रूप से निकाली गई रेत ले जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कथित तौर पर एक फॉरेस्ट गार्ड को कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 6 बजे दिमनी पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले रनपुर गांव के पास नेशनल हाईवे-552 पर हुई. उस समय वन विभाग के चार कर्मचारी गश्त के दौरान रेत से भरे चंबल नदी से निकाली गई रेत ले जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश कर रहे थे.
अखबार ने मुरैना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) समीर सौरभ के हवाले से बताया कि फॉरेस्ट गार्ड्स में से एक अपनी गाड़ी से नीचे उतरा और ट्रैक्टर को रुकने का इशारा किया.
उन्होंने कहा, ‘हालांकि, ट्रैक्टर चालक जानता था कि उसका ट्रैक्टर ज़ब्त कर लिया जाएगा, इसलिए उसने भागने की कोशिश की और गार्ड को टक्कर मार दी, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई.’ घटना के बाद चालक मौके से फरार हो गया.
मृतक की पहचान 35 वर्षीय हरकेश गुर्जर के रूप में हुई है.
सौरभ ने बताया कि चालक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है; चालक की पहचान विनोद कोरी के रूप में हुई है और ट्रैक्टर-ट्रॉली को ज़ब्त कर लिया गया है.
एसपी ने कहा, ‘चालक फिलहाल फरार है और उसे पकड़ने के लिए टीमें काम कर रही हैं. एक बार जब वह हमारी हिरासत में आ जाएगा, तो हम ट्रैक्टर के मालिक तक भी पहुंचने की कोशिश करेंगे. आगे की कोई भी कार्रवाई सबूतों के आधार पर की जाएगी.’
दिमनी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि गश्त कर रही टीम को कुछ ट्रैक्टरों की आवाजाही के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी और वे उसी के आधार पर कार्रवाई कर रहे थे.
अखबार के अनुसार, अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘घटना वन क्षेत्र की सीमा के बाहर हुई. आमतौर पर ऐसी जानकारी पुलिस के साथ साझा की जाती है, लेकिन संभवतः सुबह जल्दी होने के कारण टीम ने खुद ही ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की.’
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर सख्त रुख अपनाया है. यह तब हुआ जब अदालत ने नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन का खुद संज्ञान लिया.
मध्य प्रदेश के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि रेत खनन माफिया, जिनके पास ‘पुलिस से भी बेहतर हथियार’ होते हैं और जो अपने रास्ते में आने वालों को बेखौफ होकर मार डालते हैं, वे चंबल के आधुनिक डाकू हैं.
बता दें कि चंबल नदी विलुप्तप्राय घड़ियालों का भारत में सबसे बड़ा बसेरा है. यह संरक्षित क्षेत्र में शुमार है. इसलिए रेत उत्खनन वर्जित है. इसके बावजूद सालाना करोड़ों की रेत निकाली जा रही है. लाख सरकारी दावों के बाद भी कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
बीते कुछ वर्षों में चंबल इलाके में पुलिस व वनकर्मियों पर अनेक जानलेवा हमले और रेत/पत्थर का परिवहन करने वाले वाहनों द्वारा सरकारी मुलाजिमों की कुचलकर की गई हत्याएं की गई हैं.
इस ताज़ा घटना के बाद विपक्षी कांग्रेस ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि खनन माफिया को ‘प्रशासन का कोई डर नहीं है.’
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक कमल नाथ ने कहा, ‘यह घटना दिखाती है कि मध्य प्रदेश में खनन माफिया पूरी तरह से बेखौफ है और उसे प्रशासन का ज़रा भी डर नहीं है. यह पहली बार नहीं है जब खनन माफिया ने इस तरह से किसी सरकारी कर्मचारी की हत्या की हो. इससे पहले भी अवैध खनन रोकने के दौरान कई बार प्रशासन के अमले पर ट्रैक्टर चढ़ाने या अन्य तरह से हिंसा करने के मामले सामने आए हैं.’
नाथ ने आगे आरोप लगाया कि अवैध खनन में शामिल लोगों को ‘सत्ता में बैठे लोगों का संरक्षण’ प्राप्त है.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘बिना सत्ता के संरक्षण के खनन माफ़िया के हौसले इतने बुलंद नहीं हो सकते. अगर सरकार वाक़ई खनन माफ़िया पर अंकुश लगाना चाहती है तो बड़ी मछलियों पर कार्रवाई करनी होगी तभी इस तरह के अपराध रोके जा सकते हैं.’