ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों का 42वां दिन: इस्लामाबाद पहुंचा प्रतिनिधिमंडल, जल्द शुरू होगी निर्णायक वार्ता

ईरान पर हमलों के 42वें दिन इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की तैयारी है. पाकिस्तान की मध्यस्था में शुरू होने वाली बातचीत संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में अहम मानी जा रही है. हालांकि, अस्थायी युद्धविराम के बीच लेबनान में हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद रहना तनाव के मौजूद होने की निशानी हैं.

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों के 42वें दिन संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. अस्थायी युद्धविराम के बीच अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बातचीत शुरू होने जा रही है, जिसका उद्देश्य संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने की दिशा में कोई व्यापक समझौता तैयार करना है.

इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं, जबकि ईरान का प्रतिनिधिमंडल पहले ही वहां पहुंच चुका है. रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं, जो इस्लामाबाद में वार्ता के लिए उतर चुके हैं.

ईरान ने इस वार्ता के लिए 71 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजा है, जिसकी अगुवाई संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ कर रहे हैं. ईरानी एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, यदि तेहरान की ‘पूर्व शर्तें’ पूरी होती हैं तो बातचीत शनिवार दोपहर से ही शुरू हो सकती है.

पाकिस्तानी अख़बार डॉन के अनुसार, शुक्रवार तक इस्लामाबाद, तेहरान और वाशिंगटन के बीच बैकचैनल संपर्क तेज रहे. इन बातचीतों में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्ष भी शामिल थे. इन कोशिशों के कुछ नतीजे भी सामने आए. रिपोर्टों के मुताबिक, इज़रायल ने बेरूत और दहियाह में हमलों को फिलहाल रोका, जो ईरान की एक अहम शर्त थी.

हालांकि, एक ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर इज़रायल ने फिर से इन इलाकों में हमला किया, तो बातचीत तुरंत बंद कर दी जाएगी. उनके मुताबिक, बेरूत और दहियाह को ‘रेड लाइन’ बनाकर ही हमलों में यह अस्थायी विराम संभव हो पाया है.

इसके बावजूद इज़रायल की ओर से लेबनान पर हमले पूरी तरह थमे नहीं हैं, जो पहले घोषित युद्धविराम की शर्तों के विपरीत है. इसी के जवाब में ईरान ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है.

इस बीच, ईरान के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ग़ालिबाफ ने सोशल मीडिया पर उन बच्चों की तस्वीरें साझा की हैं, जो 28 फरवरी को एक स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले में मारे गए थे. इस हमले में 165 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल थे. ग़ालिबाफ ने इन तस्वीरों को शांति वार्ता के संदर्भ में साझा किया, जिससे युद्ध के मानवीय नुकसान की ओर ध्यान खींचा जा सके.

इस्लामाबाद में वार्ता से पहले सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. आमतौर पर व्यस्त रहने वाली सड़कों को खाली करा लिया गया है और लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है, जिससे शहर का माहौल कर्फ्यू जैसा नजर आ रहा है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने इस स्थिति को ‘निर्णायक और कठिन चरण’ बताया है. उन्होंने कहा कि अब कोशिश यह है कि अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति में बदला जाए, लेकिन यह एक ‘करो या मरो’ जैसा क्षण है.

शरीफ ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से बातचीत में भी इस पहल के लिए समर्थन मिलने की बात कही है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस शांति प्रयास को समर्थन मिल रहा है और अब जरूरी है कि युद्धविराम को कायम रखते हुए आगे की राह निकाली जाए.

कुल मिलाकर, जहां एक ओर बातचीत की मेज पर समाधान की कोशिशें तेज हुई हैं, वहीं ज़मीनी हालात, खासतौर पर लेबनान में जारी हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुजपर तनाव, इस पूरी प्रक्रिया को अस्थिर बनाए हुए हैं. आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह पहल स्थायी शांति की ओर बढ़ती है या एक और असफल कूटनीतिक प्रयास बनकर रह जाती है.