4.73 करोड़ लंबित मामले, 18.6% पद ख़ाली: सीजेआई बनने पर जस्टिस सूर्यकांत को निचली अदालतों पर देना होगा ध्यान

जस्टिस सूर्यकांत अगले महीने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे. उनके सामने निचली अदालतों में रिक्त पदों और लंबित मामलों का संकट सबसे बड़ी चुनौती होगी. देशभर की निचली अदालतों में कुल स्वीकृत में से 18.6% पद ख़ाली हैं और 4.7 करोड़ से ज़्यादा मामले लंबित हैं.

नई दिल्ली: जस्टिस सूर्यकांत अगले महीने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) का पद संभालेंगे.

आमतौर पर हर नए मुख्य न्यायाधीश अपने कार्यकाल में किए जाने वाले कामों के बारे में कुछ बड़े, का ऐलान करते हैं. लेकिन एक अहम मुद्दा जिसे जस्टिस सूर्यकांत अपने ‘करने वाले कामों’ की सूची में शामिल कर सकते हैं, वह है निचली अदालतों में खाली पदों को भरना.

निचली अदालतों में लंबित मामलों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में खाली पदों को भरना इस संकट से निपटने में बहुत मददगार साबित हो सकता है. हम सभी जानते हैं कि निचली अदालतें देश की न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं.

जहां उच्च न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट) में खाली पदों का मुद्दा अक्सर उठाया जाता है और लगातार मुख्य न्यायाधीशों के भाषणों में इसका ज़िक्र भी होता है, वहीं निचली अदालतों में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों की गंभीर समस्या पर बहुत कम लोगों ने ध्यान दिया है.

इसका मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट में रिक्त पद नहीं हैं. 1 अक्टूबर 2025 तक, हाईकोर्ट में कुल स्वीकृत 1,122 पदों में से केवल 829 पर ही जज काम कर रहे थे, यानी 293 पद (लगभग 26 प्रतिशत) खाली थे.

इस संवाददाता को मिली सरकारी जानकारी के अनुसार, निचली अदालतों में इस समय कुल 4,827 पद खाली हैं.

इनमें 2,320 सिविल जज (जूनियर डिवीजन), 787 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और 1,720 ज़िला जज के पद शामिल हैं. सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की निचली अदालतों में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 25,875 है, यानी लगभग 18.6 प्रतिशत पद खाली हैं.
जानकारी के अनुसार, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में निचली अदालतों में सबसे ज़्यादा रिक्त पद (21.8 प्रतिशत) हैं. इसके बाद गुजरात (11.1%), मध्य प्रदेश (7.9%) और बिहार (7.3%) का स्थान आता है.

उत्तर प्रदेश में ज़िला जज के लगभग 30 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि गुजरात में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत है.

यह तर्क दिया जा सकता है कि निचली अदालतों में नियुक्तियों में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या सुप्रीम कोर्ट की भूमिका बहुत सीमित होती है, लेकिन फिर भी सीजेआई इस दिशा में पहल कर सकते हैं, क्योंकि कई राज्यों में निचली अदालतों में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया अब हाईकोर्ट के नियंत्रण में है.

अगले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) इस समस्या का हल खोजने के लिए लंबे समय से टल रहे मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन को भी बुला सकते हैं, जो आखिरी बार 2022 में हुआ था. इस मुद्दे पर समाधान निकालने में राज्य सरकारों की भूमिका अहम रहेगी.

2022 के उस सम्मेलन में एक प्रमुख प्रस्ताव यह पारित हुआ था कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तेज़ की जाए और लंबित मामलों की समस्या पर काम किया जाए.

नेशनल जुडिशियल डाटा ग्रिड के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देशभर की विभिन्न निचली अदालतों में 4,73,62,460 मामले लंबित हैं, जिनमें से 2,92,97,668 मामले यानी लगभग 62 प्रतिशत एक साल से ज़्यादा समय से लंबित हैं.

यह देखते हुए कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में किस तरह के मामले आते हैं, इन संवैधानिक अदालतों में लंबित मामलों को सुलझाना भी नए मुख्य न्यायाधीश की शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए.

इस संवाददाता को मिली ताज़ा जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में 90,193 मामले लंबित हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत मामले एक साल से ज़्यादा समय से लंबित हैं.

हाईकोर्ट के मामलों में स्थिति और भी खराब है. देशभर के विभिन्न हाईकोर्ट में कुल 63,67,398 मामले लंबित हैं, जिनमें से 71 प्रतिशत से अधिक एक साल से ज़्यादा पुराने हैं.

उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में लंबित मामलों के बीच एक दिलचस्प फर्क यह है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में ज़्यादातर मामले सिविल (दीवानी) विवादों से जुड़े होते हैं, जबकि निचली अदालतों में अधिकतर मामले आपराधिक (क्रिमिनल) प्रकृति के होते हैं.

वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस बोपराई ने कहा, ‘ज़िला अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है. उम्मीद है कि आने वाले मुख्य न्यायाधीश इस समस्या को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे. वे आम लोगों की न्याय से जुड़ी मुश्किलों को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए उनसे आवश्यक पहल की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने मध्यस्थता को बढ़ावा देने की जो पहल की है, वह सराहनीय है. मेरी नज़र में जस्टिस सूर्यकांत इस संकट से निपटने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं.’