नीतीश कुमार लगातार पांचवी बार मुख्यमंत्री बनने की कगार पर हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह हैं बिहार की महिलाएं. साइलेंट वोटर कही जाने वाली महिलाएं नीतीश कुमार की सबसे बड़ी समर्थक हैं. वे खुलकर बाहर आईं और नीतीश कुमार के पक्ष में वोट डाला.

नई दिल्ली: बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन प्रचंड बहुमत की ओर अग्रसर दिख रही है. रुझानों के अनुसार, जदयू सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकती हैं. फिलहाल 79 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) आगे चल रही है.
इस तरह नीतीश कुमार लगातार पांचवी बार मुख्यमंत्री बनने की कगार पर हैं. और इसकी सबसे बड़ी वजह हैं बिहार की महिलाएं. साइलेंट वोटर कही जाने वाली महिलाएं नीतीश कुमार की सबसे बड़ी समर्थक हैं. वे खुलकर बाहर आईं और नीतीश कुमार और एनडीए के पक्ष में वोट डाला.
क्यों हैं महिलाएं नीतीश कुमार की इतनी बड़ी समर्थक
कथित ‘जंगल राज’ से वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बिहार को ‘आज़ाद’ किया था. महिलाएं उस जीत की सबसे बड़ी लाभार्थी बनीं. ग्रामीण इलाके की महिलाएं जो अपने गांव के स्कूल से ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाती थीं (ज्यादातर गांवों में पांचवी तक की कक्षाएं चलती थी, आगे की पढ़ाई के लिए पास के छोटे शहरों में नाम लिखवाना पड़ता था), नीतीश सरकार द्वारा प्रोत्साहन मिलने के बाद महिलाओं में स्कूल छोड़ने की दर में काफ़ी गिरावट देखी गई.
महिलाएं जो अपने गांव से बाहर नहीं निकल पाती थीं, वे दूसरे गांवों और शहरों में जाकर पढ़ाई करने लगीं. इसका कारण सिर्फ़ शांति बहाल होना नहीं था, नीतीश कुमार ने लड़कियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई सारी योजनाएं निकाली. उसमें सबसे अहम थी कक्षा 9 की छात्राओं के बीच साइकिल वितरण योजना. साल 2006 में इस योजना की शुरुआत हुई थी, जिसके अंतर्गत स्कूली छात्राओं को साइकिल ख़रीदने के लिए 2000 रुपये की राशि वितरित की जाने लगी. इस योजना के चलते साल 2006 से 2014 तक स्कूली छात्राओं के बीच स्कूल छोड़ने की दर में भारी गिरावट दर्ज की गई. 2006 के पहले यह दर 17.6% थी जो 2014 में घट कर 5.7% तक रह गई.
ये जो बदलाव देखा गया था, महिलाएं उसे आज तक नहीं भूली हैं. कई सारे घर तो ऐसे हैं जहां घर के पुरुष सदस्यों ने दूसरी पार्टियों को वोट दिया है लेकिन स्त्रियों ने नीतीश कुमार के लिए वोट किया.जहानाबाद की रहने वाली ऐसी ही एक महिला रीना देवी ने द वायर हिंदी से कहा कि ‘मैं ताउम्र नीतीश कुमार को वोट करूंगी क्यूंकि उनकी सरकार आने के बाद मैं बिना किसी डर के घर से बाहर निकलने लगी, बाज़ार जाने लगी.’
वह आगे कहती हैं, ‘जब मैं स्कूल में थी तब बिहार में लालू की सरकार थी, मेरे गांव के स्कूल में पांचवी कक्षा से आगे की पढ़ाई नहीं होती थी, उस समय माहौल ऐसा था कि मैं तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव में आगे की पढ़ाई करने नहीं जा सकती थी. इस कारण मेरी पढ़ाई बीच में ही छूट गई.’
रीना की तरह कई अन्य ऐसी महिलाएं हैं जो आज तक नीतीश कुमार को वोट दे रही हैं.
10 हजार रुपये की राशि का कितना बड़ा योगदान?
बिहार में 1.21 करोड़ महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दस-दस हज़ार रुपये बांटे गए. ये राशि चुनाव से ठीक पहले वितरित की गई. इस पूरे प्रकरण पर चुनाव आयोग की निष्क्रियता कई तरह के सवाल खड़े करती है. लेकिन नीतीश सरकार की इस योजना ने एनडीए को चुनाव में भारी बढ़त दिलाई. नीतीश कुमार की ताक़त मानी जाने वाली महिला वोटरों को इस योजना ने और मजबूती के साथ उनकी तरफ़ किया.
शुरुआत में यह योजना आजीविका से जुड़े काम करने वाली महिलाओं के लिए शुरू की गई थी, बाद में इसे अन्य महिलाओं पर भी लागू किया गया.
जीविका दीदियों ने घर-घर जा कर महिलाओं तक संदेश पहुंचाया कि अगर नीतीश कुमार दुबारा मुख्यमंत्री चुने जाते हैं तो ऐसी अन्य योजनाओं का लाभ खासकर के ग्रामीण महिलाओं को मिलता रहेगा. इन महिलाओं ने जदयू के लिए उनके कार्यकर्ताओं से अधिक काम किया और महिला वोटर्स को जदयू के साथ जोड़ दिया.
जब स्त्री मतदाता किसी नेता के साथ हो, उसकी जीत लगभग निश्चित है. यही नीतीश के साथ हुआ.