एनआईए ने कहा- लाल क़िले के पास हुआ विस्फोट कार से किया गया आत्मघाती हमला था

बीते सप्ताह लाल क़िले के पास हुए धमाके की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रविवार को कहा है कि विस्फोट करने वाली कार चला रहा उमर उल नबी एक ‘सुसाइड बॉम्बर’ था. एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में यह पहला ऐसा आत्मघाती हमला था, जो कार की मदद से किया गया.

नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके में 13 लोगों की मौत के एक सप्ताह बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रविवार (16 नवंबर) को कहा है कि कार चलाने वाला पेशे से डॉक्टर उमर उल नबी एक ‘सुसाइड बॉम्बर’ था.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, एनआईए ने कश्मीर के एक निवासी को गिरफ्तार किया है, जिस पर उमर नबी के साथ मिलकर इस आतंकी हमले की साजिश रचने का आरोप है.

एनआईए के बयान से यह पुष्टि होती है कि राष्ट्रीय राजधानी में यह पहला ऐसा आत्मघाती हमला था,जो कार की मदद से किया गया.

इससे पहले 10 नवंबर के विस्फोट के तुरंत बाद गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा था कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि विस्फोट समय से पहले हो गया था. पुलिस के दबाव और उसके दो साथियों की गिरफ्तारी के चलते संदिग्ध जल्दबाज़ी में था, इसलिए विस्फोट उतना बड़ा नहीं हुआ जितना हो सकता था.

रविवार को एनआईए ने बताया कि जिस कार से धमाका हुआ था, वह किसी आमिर राशिद अली के नाम से रजिस्टर्ड थी. राशिद अली को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है.

एनआईए ने 11 नवंबर को दिल्ली पुलिस से यह केस अपने हाथ में ले लिया था, और उसके बाद कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है.

एनआईए के मुताबिक, उसकी जांच में यह सामने आया है कि जम्मू-कश्मीर के पंपोर के सांबूरा निवासी आमिर ने कथित ‘सुसाइड बॉम्बर’ उमर नबी के साथ हमले की साजिश रची थी.

एनआईए ने कहा, ‘आमिर दिल्ली आया था ताकि उस कार की खरीद में मदद कर सके, जिसे बाद में वाहन-आधारित आईईडी के रूप में इस्तेमाल किया गया था.’

एजेंसी ने यह भी बताया कि फॉरेंसिक जांच से मारे गए कार ड्राइवर की पहचान उमर नबी के रूप में हुई है. वह पुलवामा का निवासी था और हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी में जनरल मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर था.

एनआईए के बयान में कहा गया है, ‘एजेंसी ने नबी की एक दूसरी कार भी जब्त की है, जिसे सबूतों के लिए खंगाला जा रहा है. एजेंसी अब तक 73 गवाहों से पूछताछ कर चुकी है, जिनमें धमाके में घायल लोग भी शामिल हैं.’

बताया गया है कि दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एनआईए की कई राज्यों में इस ब्लास्ट से संबंधित जांच जारी है.

एजेंसी ने कहा, ‘हमले के पीछे की बड़ी साज़िश का पता लगाने और अन्य शामिल लोगों की पहचान के लिए कई सुरागों पर काम चल रहा है.’

घटनास्थल पर मिले कारतूस: दिल्ली पुलिस सूत्र

उधर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि धमाके वाली जगह से 5 बुलेट कारतूस मिले हैं, जिनमें दो 9 एमएम के इस्तेमाल किए हुए कारतूस भी शामिल हैं.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसे कारतूस आम नागरिकों को जारी नहीं किए जाते और सिर्फ विशेष बलों या विशेष अनुमति वाले व्यक्तियों को ही दिए जाते हैं. जांच में पाया गया कि वहां तैनात किसी भी सुरक्षाकर्मी का कोई कारतूस गायब नहीं था.

बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में कार डीलरों और खाद-रसायन बेचने वालों- खासकर अमोनियम नाइट्रेट बेचने वालों की जांच तेज कर दी है.

यह जांच अभियान उस समय शुरू हुआ जब 9-10 नवंबर को फरीदाबाद में छापेमारी के दौरान लगभग 2,900 किलो विस्फोटक बरामद किया गया, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल था. यह बरामदगी कश्मीर में सात-सदस्यीय अंतर-राज्यीय ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का पता लगने के बाद हुई.
30 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच इस मॉड्यूल से जुड़े तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था. बाद में बताया गया है कि जांच में यह पूरा मामला दिल्ली कार धमाके से जुड़ा पाया गया, क्योंकि लाल किले के पास विस्फोट करने वाली आई20 कार का चालक डॉक्टर उमर नबी उन्हीं तीन में से दो डॉक्टरों- मुज़म्मिल अहमद गनई और अदील अहमद राथर का सहयोगी था. ये तीनों दक्षिण कश्मीर के निवासी हैं.

तीसरी डॉक्टर शाहीन सईद लखनऊ की रहने वाली है और अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी में काम करती थीं, जहां डॉ. गनई और डॉ. नबी भी काम करते थे. डॉ. राथर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया है.