जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भाजपा से जुड़े कम से कम तीन रतले पावर प्रोजेक्ट कर्मचारियों को राष्ट्र-विरोधी क़रार दिया

किश्तवाड़ के रतले पावर प्रोजेक्ट में काम कर रही मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को भेजे गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक पत्र में जिन 29 कर्मचारियों को ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ बताया गया है, उनमें से कम से कम तीन का संबंध भाजपा से रहा है.

श्रीनगर: किश्तवाड़ के रतले पावर प्रोजेक्ट में काम कर रही मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) को भेजे गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक पत्र में जिन 29 कर्मचारियों को ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ बताया गया है, उनमें से कम से कम तीन का संबंध भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से रहा है. द वायर इस बात की पुष्टि कर सकता है.

इन कर्मचारियों में से कुछ की तस्वीरें भाजपा नेताओं के साथ हैं, जिनमें किश्तवाड़ की विधायक शगुन परिहार भी शामिल हैं. एमईआईएल ने परिहार पर किश्तवाड़ के द्राबशाला क्षेत्र में चल रहे 850 मेगावाट रन-ऑफ-द-रिवर पावर प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी परिहार और विपक्ष के नेता तथा वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील शर्मा पर उन पावर प्रोजेक्ट्स में दखल देने का आरोप लगाया है जिन्हें अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने तेजी से आगे बढ़ाया है.

भाजपा नेताओं ने इन आरोपों से इनकार किया है.
परिहार ने दावा किया है कि 1 नवंबर को किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी पत्र, जिसमें 29 एमईआईएल कर्मचारियों को ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ बताया गया, इस बात की पुष्टि करता है कि उनका दल सही कह रहा था कि अरबों रुपये का यह प्रोजेक्ट आतंकवादियों और पाकिस्तान से खतरे में है.

एसएसपी के पत्र में हैदराबाद स्थित एमईआईएल से इन 29 कर्मचारियों – जो सभी किश्तवाड़ के निवासी हैं – की नौकरी पर पुनर्विचार करने को कहा गया है, यह कहते हुए कि वे इस ‘राष्ट्रीय परियोजना’ की सुरक्षा से समझौता कर सकते हैं.

एमईआईएल के रतले प्रोजेक्ट प्रमुख हरपाल सिंह ने 16 दिसंबर को पुलिस को जवाब देते हुए आश्वासन दिया कि इन कर्मचारियों पर ‘कड़ी निगरानी’ रखी जा रही है और ‘किसी भी राष्ट्र-विरोधी/परियोजना-विरोधी गतिविधि’ की तुरंत सूचना पुलिस को दी जाएगी.

द वायर के पास मौजूद दस्तावेज़ बताते हैं कि इन कर्मचारियों में से कुछ को इसी वर्ष 8 मार्च को भाजपा की द्राबशाला इकाई में महत्वपूर्ण पद दिए गए थे.

पत्र में किनका नाम है?

एसएसपी के पत्र में क्रम संख्या 20 पर दर्ज जीवन लाल ठाकुर को द्राबशाला इकाई का ‘मंडल अध्यक्ष’ नियुक्त किया गया था, जबकि क्रम संख्या 12 पर दर्ज आसिफ़ हुसैन को उसी इकाई का महासचिव बनाया गया. पार्टी में इनके शामिल होने की घोषणा 8 मार्च को ठाकुर द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में की गई थी.

यह स्पष्ट नहीं है कि वे अभी भी पार्टी से जुड़े हैं या नहीं. द वायर के पास मौजूद तस्वीरों में हुसैन को परिहार के साथ देखा जा सकता है.

क्रम संख्या दो पर दर्ज शाहज़ाद हुसैन भाजपा के सदस्य हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन कोड ****3419 है. वे किश्तवाड़ के सरूर गांव के टांडा क्षेत्र में पार्टी के बूथ अध्यक्ष के रूप में काम करते हैं.

क्रम संख्या 16 पर दर्ज तनवीर अहमद का परिवार भी भाजपा से जुड़ा हुआ है. उनके भाई सफदर अली भाजपा कार्यकर्ता हैं, जिन्हें किश्तवाड़ एमईआईएल के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया है.
स्रोतों के अनुसार, पत्र में क्रम संख्या आठ पर दर्ज काशिफ़ अली ने भी द्राबशाला में अल्पसंख्यक मंडल अध्यक्ष के रूप में काम किया है, जबकि क्रम संख्या चार पर दर्ज रंगील सिंह भी पार्टी कार्यकर्ता हैं. एसएसपी के पत्र में नामजद रतले प्रोजेक्ट के तीन कर्मचारी हिज़बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ़ जहांगीर सरूरी के रिश्तेदार हैं.

इनकी पहचान अमीन के भाई मोहम्मद इकबाल, उनके भतीजे तनवीर अहमद और चचेरे भाई शमशदीन के रूप में हुई है. अहमद को सीआईडी की स्पेशल ब्रांच के रिकॉर्ड में ओजीडब्ल्यू (आतंकियों का जमीनी मददगार) के रूप में दर्ज किया गया है.

किश्तवाड़ के भाजपा नेताओं ने एमईआईएल पर आरोप लगाया है कि उसने रतले प्रोजेक्ट में ऐसे लोगों को नौकरी दी है जिनके आतंकवाद और पाकिस्तान से संबंध हैं.

हालांकि, जम्मू-कश्मीर की सबसे युवा विधायक परिहार के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सरूरी के परिवार को अपने पक्ष में करने की कोशिश की थी. 1992 से सरूरी किश्तवाड़ में सक्रिय हैं.

टिप्पणी के लिए बार-बार कोशिश के बावजूद परिहार से संपर्क नहीं हो सका. प्रतिक्रिया मिलने पर अपडेट की जाएगी.
रतले प्रोजेक्ट के जिन अन्य दो कर्मचारियों के आतंकी संबंध होने का दावा किया गया है, उनकी पहचान फगुमार के निवासी चंडी मोहम्मद के रूप में हुई है, जिनके पिता मोहम्मद इसरायल ‘ओजीडब्ल्यू’ के रूप में दर्ज हैं, और द्राबशाला के निवासी मोहम्मद नैयर के रूप में, जिनके पिता अब्दो कलाम मट्टो को पत्र में ‘सरेंडर्ड मिलिटेंट’ बताया गया है.

पत्र में यह नहीं बताया गया है कि क्या इन पांच कर्मचारियों का नाम किसी एफआईआर में है या नहीं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है.

गौरतलब है कि पुलिस के पत्र में यह भी उल्लेख है कि रतले प्रोजेक्ट के 29 में से 24 कर्मचारियों के खिलाफ ‘राष्ट्र-विरोध’ और ‘उपद्रव’ जैसे गंभीर आरोप लगाने के लिए केवल छोटी-मोटी धाराओं- जैसे लापरवाही से गाड़ी चलाना, घर में घुसना, शरारत आदि – से जुड़ी तीन एफआईआर का हवाला दिया गया है.

पत्र से पता चलता है कि 22 कर्मचारियों का नाम एक ही एफआईआर (नंबर 92) में दर्ज है, जिसे इस वर्ष किश्तवाड़ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस) की धाराओं 329 (आपराधिक अतिक्रमण और घर में घुसना), 324 (शरारत) और 331 (घर में घुसपैठ) के तहत दर्ज किया था.

आधिकारिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि यह मामला तब दर्ज किया गया जब एमईआईएल ने इस वर्ष 25 अप्रैल को पुलिस को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने द्राबशाला स्थित प्रोजेक्ट साइट पर एक भू-विज्ञान उपकरण स्टोर का ताला तोड़ दिया और ‘अपना ताला लगाकर कमरे पर कब्ज़ा कर लिया.’

सूत्रों के अनुसार, 25 अप्रैल को रतले प्रोजेक्ट के कर्मचारियों द्वारा एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसके बाद यह एफआईआर दर्ज की गई.

एसएसपी के पत्र में रतले प्रोजेक्ट के दो अन्य कर्मचारियों – मोहम्मद शफी और डिम्पल कुमार – पर बीएनएस की धारा 279 (सार्वजनिक झरने या जलाशय के पानी को दूषित करना) और धारा 337 (जालसाजी) से संबंधित अलग-अलग मामलों में कथित संलिप्तता के लिए ‘उपद्रवी/राष्ट्र-विरोधी’ करार देने के औचित्य को सही ठहराने की बात भी कही गई है.

शफी का नाम पत्र में क्रम संख्या पांच पर है, जबकि कुमार का नाम क्रम संख्या दस पर दर्ज है. ये तीनों मामले या तो अदालत में विचाराधीन हैं या मुकदमे की प्रक्रिया में हैं.

पत्र में क्रम संख्या 20 पर दर्ज ठाकुर, जो भवन निर्माण मजदूर संगठन की रतले पावर प्रोजेक्ट यूनियन के अध्यक्ष हैं, ने कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया.

ठाकुर ने कहा, ‘यदि इस राष्ट्रीय परियोजना को कमजोर करने की कोई कोशिश होती है, तो हम सुरक्षा एजेंसियों और किश्तवाड़ पुलिस की मदद करेंगे. स्थानीय राजनीतिक नेताओं को राजनीति करने के बजाय किश्तवाड़ के गरीब लोगों के सशक्तिकरण के लिए काम करना चाहिए.’ उन्होंने स्थिति को शांत करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की मांग की.