केंद्रीय मंत्री चौहान बोले- मनरेगा में 10 लाख से ज्यादा शिकायतें, फर्जी मजदूरों का खेल चला

भोपाल/मंगल भारत। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम वास्तव में भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम है। कांग्रेस के पेट में दर्द यही है कि अब भ्रष्टाचार की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा कि कांग्रेस हमेशा विकास का विरोध करती रही है। कांग्रेस को ग्राम से परेशानी, कांग्रेस को काम से परेशानी, कांग्रेस को राम से परेशानी है। ये ही उनके राजनीतिक डीएनए की पहचान है।
मोदी सरकार ने किया 8.48 लाख करोड़ का निवेश: चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक 8 लाख 48 हजार करोड़ रुपए ग्रामीण विकास पर खर्च किए जा चुके हैं, जबकि यूपीए शासन में यह राशि केवल 2 लाख करोड़ रुपए थी। इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद भी सवाल है, क्या गांवों में स्थायी संपत्ति बनी? क्या गांव और मजदूर का जीवन बदला? उन्होंने कहा कि नई योजना भ्रष्टाचार मुक्त, टेक्नोलॉजी आधारित और मजदूर केंद्रित सुधार है। इस योजना में 100 के बजाय 125 दिन की कानूनी गारंटी है। काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और भुगतान में देरी पर दंड का प्रावधान है। ग्राम पंचायतों को पूरा अधिकार है कि वे तय करें कौन सा काम गांव में हो। अब ऊपर से ठोककर नहीं, नीचे से तय होगा- गांव खुद अपने विकास का प्लान बनाएगा। यह योजना गांव को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने का ब्लूप्रिंट है। इस योजना में 1.51 लाख करोड़ की धनराशि और मजदूरों के हित पर पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में 1,51,282 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें से 95,600 करोड़ रुपए केंद्र सरकार देगी। प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है ताकि रोजगार सहायकों, तकनीकी स्टाफ और मेट्स को समय पर मानदेय मिले। इसके लिए 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि रखी गई है।
अप्रैल 2026 से लागू होने की तैयारी कर रही इस योजना को सरकार ‘विकसित भारत जी राम जी’ के रूप में विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक आधुनिक सुधार मानती है, जिसका उद्देश्य लागू करने योग्य अधिकार, जवाबदेही और सतत विकास सुनिश्चित करना है।
लोकसभा में सच सुनने की हिम्मत नहीं थी
रविवार को दिल्ली में मीडिया से चर्चा में शिवराज ने लोकसभा की बहस का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने पूरी बात सुनने का साहस नहीं दिखाया। मैंने कहा था- मुझे सुनकर जाइए, लेकिन मेरी आवाज दबाने की कोशिश की गई। शिवराज सिंह ने कहा कि मनरेगा ईमानदार रोजगार का नहीं, भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई थी। मजदूरों के नाम पर ठेकेदारों से काम होने लगा था और मशीनों से काम दिखाकर मजदूरी उठा ली गई। एक ही सडक़ हर साल नई बना दी गई। 80 साल के मजदूर और फर्जी उपस्थिति के रिकॉर्ड नजर आए। उन्होंने बताया कि ग्राम सभाओं के सोशल ऑडिट में 10 लाख 91 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
भ्रम फैलाना बंद करे कांग्रेस, सत्य को स्वीकार करे
उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह देश को गुमराह न करे। यह समय संग्राम का नहीं, सहयोग का है। कांग्रेस झूठ और भ्रम फैलाना बंद करें। शिवराज ने कहा कि नई व्यवस्था में खेती के पीक सीजन के अनुरूप काम तय किए जाएंगे, ताकि किसान और मजदूर दोनों का हित सुरक्षित रहे। जहां खेती करनी है वहां खेती हो और जब खेतों में काम नहीं, तो गांव के विकास के काम मिलें।
योजना के मांग आधारित स्वरूप को कमजोर करने की आशंकाएं निराधार
संसद में इस सप्ताह हुई गरमागरम बहस और विपक्ष के विरोध के बीच पारित इस विधेयक के तहत हर ग्रामीण परिवार को सालाना मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। अपने लेख में कृषि मंत्री ने विधेयक से जुड़ी प्रमुख आलोचनाओं का जवाब दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि योजना के मांग-आधारित स्वरूप को कमजोर करने की आशंकाएं निराधार हैं, क्योंकि यह कानून सरकार को न्यूनतम 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश देता है।