नासा का आर्टेमिस-2 मिशन: पहली बार चंद्रमा के करीब जाएगा कोई अश्वेत

नासा का आर्टेमिस-2 मिशन: पहली बार चंद्रमा के करीब जाएगा कोई अश्वेत

नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम चंद्रमा पर इंसानों की वापसी का बड़ा प्लान है। इसका दूसरा मिशन आर्टेमिस-2 फरवरी-2026 में लॉन्च हो सकता है। लॉचिंग अमेरिका के फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39 बी से होगी। यह 1972 के अपोलो-17 के बाद पहला मानव मिशन होगा जो चंद्रमा के आसपास जाएगा। यह मिशन करीब 10 दिन का होगा। जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में रिड वाइजमैन कमांडर, नासा, विक्टर ग्लोवर पायलट नासा। पहली बार कोई अश्वेत व्यक्ति चंद्रमा के इतना करीब जाएगा। क्रिस्टीना कोच मिशन स्पेशलिस्ट नासा। ये सबसे लंबे समय तक स्पेस में रहने वाली महिला का रिकॉर्ड। जेरमी हैंसन मिशन स्पेशलिस्ट, कैनेडियन स्पेस एजेंसी। पहली बार कोई गैर-अमेरिकी चंद्रमा के इतना करीब जाएगा। यह मिशन चंद्रमा पर स्थाई बेस बनाने और मंगल जाने की राह तैयार करेगा। 2022 के आर्टेमिस-1 (बिना मानव) की सफलता के बाद अब मानव के साथ टेस्ट। अगर सब ठीक रहा, तो 2027 में चंद्रमा पर उतरेंगे। यह अंतरिक्ष इतिहास का नया अध्याय होगा। चंद्रमा की फ्री-रिटर्न परिक्रमा। पहले पृथ्वी की कुछ परिक्रमाएं, फिर चंद्रमा के पीछे से गुजरकर वापस चंद्रमा से सबसे करीब दूरी करीब 7400 किमी होगी. लैंडिंग नहीं होगी, सिर्फ घूमकर वापस।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे, जो 8 जनवरी से 11 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इस चार दिवसीय आयोजन में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की श्रृंखला चलेगी। अधिकारियों ने बताया कि इस अवसर पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत साल भर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आत्मसम्मान के भाव को सशक्त करना है। समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, आध्यात्मिक प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामाजिक जागरूकता से जुड़े आयोजन किए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री के दौरे से पहले एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा, सोमनाथ मंदिर की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है। ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता के करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है।
आईपीआईएस तकनीक पता चलेगी ट्रेनों की लाइव स्थिति, प्लेटफॉर्म चलेगा पता
भारतीय रेल यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस क्रम में मालदा रेल मंडल अंतर्गत आने वाले ए श्रेणी के जमालपुर जंक्शन पर इंटीग्रेटेड पैसेंजर इनफार्मेशन सिस्टम (आईपीआईएस) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के लागू होने से रेल यात्रियों को ट्रेनों से संबंधित अपडेट या जानकारी एक ही स्थान पर आडियो-विजुअल माध्यम से मिल सकेगी, जिससे उनकी यात्रा और भी आसान एवं सुविधाजनक हो जाएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार आईपीआईएस के माध्यम से यात्रियों को डिजिटल पैटर्न पर ट्रेन की लाइव स्थिति, आने-जाने का समय, प्लेटफार्म नंबर सहित अन्य सूचनाएं प्रदर्शित की जाएंगी। अब यात्रियों को बार-बार पूछताछ काउंटर या अनाउंसमेंट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। स्टेशन परिसर में लगाए गए डिस्प्ले बोर्ड और स्वचालित उद्घोषणा प्रणाली के जरिए सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध होंगी।
एम्स का दावा! अस्पताल का आईसीयू बीमारी का अड्डा, चौंकाने वाली रिपोर्ट
अस्पतालों में गंभीर मरीजों को जीवन रक्षक इलाज देने वाली आईसीयू अब संक्रमण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में सामने आ रही है। यह दावा हम नहीं, बल्कि नई दिल्ली एम्स में किए गए एक शोध और अस्पताल आधारित निगरानी से पता चला है कि आईसीयू में भर्ती मरीजों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, लंबे समय तक भर्ती और अत्याधुनिक उपकरणों का लगातार इस्तेमाल इस खतरे को और बढ़ा देता है। यह अध्ययन भारत में अपनी तरह का सबसे बड़ा निगरानी नेटवर्क है। इसमें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 190 से अधिक आईसीयू शामिल थे। एम्स के माइक्रोबायोलाजी एवं इंफेक्शन कंट्रोल विभाग द्वारा आईसीयू मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि अस्पताल में होने वाले संक्रमणों का सबसे बड़ा हिस्सा आईसीयू से जुड़ा होता है। इस अध्ययन में फेफड़ों के संक्रमण (निमोनिया), मूत्र मार्ग संक्रमण, रक्त संक्रमण और ऑपरेशन के बाद होने वाले इंफेक्शन को सबसे ज्यादा गंभीर बताया गया है।