पंजाब के मुख्यमंत्री की ग़ैर-मौजूदगी में उनके हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज एफआईआर के ख़िलाफ़ तीन पत्रकारों और एक आरटीआई कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख़ किया है. इस बीच, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस मामले में पुलिस कार्रवाई की निंदा की है.

नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री की ग़ैर-मौजूदगी में उनके हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाने को लेकर दस लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है.
इस संबंध में तीन पत्रकारों और एक आरटीआई कार्यकर्ता ने कथित तौर पर गलत सूचना फैलाने के आरोप में अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर के ख़िलाफ़ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया है.
मालूम हो कि इन चार लोगों के अलावा एफआईआर में छह अन्य व्यक्तियों और सोशल मीडिया पेज का भी जिक्र है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एफआईआर कानून के छात्र और आरटीआई कार्यकर्ता माणिक गोयल के सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित है, जिसमें उन्होंने 8 दिसंबर को मुख्यमंत्री को आवंटित हेलीकॉप्टर की आवाजाही पर सवाल उठाए थे, जब मुख्यमंत्री जापान दौरे पर थे.
इस संबंध में बठिंडा के पत्रकार मनिंदरजीत सिद्धू, मिंटू गुरसरिया और मनदीप सिंह ने आरटीआई को आधार बनाते हुए इस मामले पर रिपोर्टिंग की और बाद में इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया.
मालूम हो कि पंजाब की लुधियाना पुलिस ने पिछले महीने आरटीआई कार्यकर्ता मणिक गोयल समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने ‘तोड़े-मरोड़े गए और अप्रमाणित कंटेंट’ को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है.
एफआईआर के अनुसार, आईटी सेल ने मिंटू गुरुसरिया, गगन रामगढ़िया, हरमन फार्मर, मनदीप मक्कर, गुरलाल एस. मान, स्नाम्मु धालीवाल, मानिक गोयल, अर्जन लाइव, दीप मंगली और लोक आवाज टीवी के नाम से संचालित अकाउंट्स द्वारा अपलोड की गई कई फेसबुक पोस्टों को चिह्नित किया, जिनमें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की आधिकारिक विदेश यात्राओं के दौरान उनसे जुड़े हेलीकॉप्टर की तैनाती और उपयोग के संबंध में कथित तौर पर ‘विकृत, अपुष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत’ दावे किए गए थे.
ये एफआईआर पुलिस इंस्पेक्टर सतबीर सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई थी. इसमें किसी निजी शिकायतकर्ता का उल्लेख नहीं किया गया था.
इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(1) (झूठे बयान, अफवाह या रिपोर्ट को प्रकाशित/प्रसारित करना), 353(2) (धर्म, जाति आदि के आधार पर वैमनस्य फैलाने की नीयत से झूठी जानकारी फैलाना) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया है.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की
पत्रकारों के संगठन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने इस मामले में पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की है.
पीसीआई द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पंजाब पुलिस की मनमानी कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री के आधिकारिक हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग के संबंध में रिपोर्टिंग करने वाले बठिंडा के पत्रकारों मनिंदरजीत सिद्धू, मिंटू गुरसरिया और मनदीप सिंह के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है.’
बयान में आगे कहा गया है, ‘पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार को यह याद दिलाना महत्वपूर्ण है कि ऐसे सामान्य मामलों पर रिपोर्टिंग करना पत्रकारों का काम है. यदि पंजाब पुलिस या सरकार को लगता है कि उक्त ख़बरों में तथ्यों पर विवाद है, तो इन आरोपों के खंडन करने के कई तरीके हैं, लेकिन आपराधिक शिकायत दर्ज करना उनमें से एक नहीं है.’
संगठन का कहना है कि एफआईआर दर्ज करना संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ए) का उल्लंघन करते हुए प्रेस को चुप कराने के पंजाब सरकार के इरादे को स्पष्ट करता है.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पंजाब पुलिस और राज्य सरकार से पत्रकारों के ख़िलाफ़ आरोप वापस लेने का आग्रह किया गया है.