केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पिछले बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार एक लाख करोड़ रुपये का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ स्थापित करेगी, जिसका उद्देश्य शहरों को विकास केंद्र के रूप में विकसित करना, शहरों में बंजर भूमि का पुनर्विकास करना और 100 शहरों में जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजनाओं को बढ़ावा देना है. हालांकि, 11 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह कोष अभी तक शुरू नहीं हो पाया है.

नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए अगामी बजट पेश होने में महज़ चंद दिन बचे हैं, वहीं मौजूदा वित्त वर्ष समाप्त होने में कुछ ही महीने का समय बाकी है. ऐसे में ख़बरों की मानें, तो पिछले बजट (फरवरी 2025) में केंद्र सरकार द्वारा घोषित शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए एक लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड योजना को अभी तक ही शुरू ही नहीं किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल फरवरी में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि सरकार एक लाख करोड़ रुपये का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ स्थापित करेगी, जिसका उद्देश्य शहरों को विकास केंद्र के रूप में विकसित करना, शहरों में बंजर भूमि का पुनर्विकास करना और 100 शहरों में जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजनाओं को बढ़ावा देना है.
ये वही उद्देश्य थे जिसका सीतारमण ने जुलाई 2024 के भी अपने भाषण में उल्लेख किया था.
सीतारमण का कहना था कि यह कोष बैंक से ऋण प्राप्त करने योग्य परियोजनाओं की लागत के एक चौथाई तक की फंडिंग करेगा, बशर्ते कुल लागत का कम से कम आधा हिस्सा बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से वित्तपोषित किया जाए.
उल्लेखनीय है कि सरकार ने अनुदान की अपनी मांगों में 2025-26 के लिए इस कोष के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था. हालांकि, 11 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह कोष अभी तक शुरू नहीं हो पाया है.
इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बीते अक्टूबर में कार्यक्रम के लिए दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दे दिया था, लेकिन पिछले तीन महीनों में इन्हें कैबिनेट की अनिवार्य मंजूरी नहीं मिली है.
अखबार ने मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा, ‘कम से कम 15 राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं. कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही हम निधि आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे.’
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, इस निधि का उपयोग ‘द्वितीय और तृतीय स्तरीय शहरों सहित’ शहरी अवसंरचना के ‘संवर्धन/उन्नयन/मरम्मत और सुधार’ के लिए किया जाएगा.
इस संबंध में सीतारमण ने 2024 में कहा था कि ‘शहरों को विकास केंद्र’ के रूप में विकसित करने के सरकार के लक्ष्य में ‘आर्थिक और परिवहन नियोजन’ के साथ-साथ ‘शहर के बाहरी क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास’ भी शामिल है.
पिछले महीने संसद में अर्बन चैलेंज फंड के कार्यान्वयन संबंधी विवरण, जिसमें सरकार को प्रस्तावित परियोजनाओं की स्थिति भी शामिल है, के बारे में पूछे जाने पर राज्य मंत्री तोखन साहू ने केवल इतना कहा था कि ‘इस फंड के लिए योजनाएं विचाराधीन हैं’ और ‘योजनाओं की मंजूरी के बाद, पात्रता मानदंड और भागीदारी मानदंड को अंतिम रूप दिया जाएगा और प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे.’
यह कोष 2025-26 के बजट में की गई कई घोषणाओं में से एक है जो अभी तक कार्यान्वित नहीं हुई हैं या आंशिक रूप से ही लागू है.