आरजी कर रेप-हत्या: पीड़िता की मां ने भाजपा के टिकट पर हामी भरी, कहा- वही बेटी को न्याय दिलाने में सक्षम

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

नई दिल्ली: आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. साथ ही तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों की आलोचना की.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, कुछ ही घंटों के भीतर भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, जिसमें इस सीट को खाली रखा गया. पार्टी अब तक 294 में से 255 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है.

पीड़िता की मां ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. प्रस्ताव बार-बार आया, लेकिन शुरू में मैंने सहमति नहीं दी. आखिरकार मैंने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार और उनकी सुरक्षा की कमी के कारण टीएमसी को उखाड़ फेंकने के लिए उम्मीदवार बनने का फैसला किया.’

उनकी बेटी, जो स्नातकोत्तर ट्रेनी थी, की अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर के भीतर रात में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. एक स्थानीय प्रभावशाली नागरिक स्वयंसेवक को जनवरी 2025 में आजीवन कारावास की सजा दी गई है.

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर स्वतःस्फूर्त और लंबे समय तक सड़क पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.

मां ने कहा, ‘सभी दल हमें टिकट देने आए थे. लेकिन हमने सोचा कि मेरी बेटी को न्याय दिलाने में भाजपा ही सक्षम है.’ उनके पति ने कहा, ‘उन्होंने पनिहाटी सीट की पेशकश की और अब उन्होंने चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है.’

भाजपा के एक सूत्र ने बताया कि पार्टी ने उत्तर 24 परगना जिले के पनिहाटी से उनकी उम्मीदवारी लगभग तय कर ली थी, लेकिन मामला सार्वजनिक होने और विवाद पैदा होने के बाद घोषणा से पीछे हट गई- खासकर इसलिए क्योंकि आरजी कर विरोध प्रदर्शन खुद को काफी हद तक गैर-राजनीतिक बनाए हुए थे.

अखबार के अनुसार, इस मुद्दे पर पूछे जाने पर राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

टीएमसी और वाम दलों की आलोचना

विवाद का एक कारण यह भी रहा कि मृतका के माता-पिता ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वाम दलों पर आरोप लगाया कि वे उनकी बेटी की मौत से राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में बने रहने में मदद कर रहे हैं.

द टेलीग्राफ के अनुसार, पिता ने कहा, ‘वाम मोर्चा 34 साल के शासन के बाद सत्ता से बाहर हुआ, लेकिन उसने टीएमसी विरोधी वोटों को बांटकर उसे सत्ता में बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘बारानगर में भाजपा उम्मीदवार साजल घोष की हार इसलिए हुई क्योंकि वाम उम्मीदवार ने उनके वोट काट दिए.’

मां ने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा, ‘मैंने देखा कि सीपीएम ने मेरी बेटी के मामले का राजनीतिक उपयोग किया, जिससे उसका आधार मजबूत हुआ और टीएमसी को वोट कटने से फायदा मिला, इसलिए मैंने भाजपा के साथ चुनावी राजनीति में आने का फैसला किया.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘मैंने खुद भाजपा नेताओं को फोन कर अपनी उम्मीदवारी की इच्छा जताई.’ उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने किन नेताओं से बात की.

सीपीएम ने पीड़ित परिवार से निष्पक्ष रहने की अपील की
इस बीच, सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि पार्टी का पीड़ित परिवार से कोई टकराव नहीं है, लेकिन उन्होंने उनसे निष्पक्ष रहने की अपील की.

उन्होंने कहा, ‘हमारा परिवार से कोई विरोध नहीं है, लेकिन वामपंथ की लड़ाई आरएसएस-भाजपा से है. मैं माता-पिता से अनुरोध करूंगा कि वे किसी पक्ष में न जाएं, क्योंकि राज्य, देश और दुनिया भर से वाम समर्थक लोग इस अपराध के खिलाफ और न्याय की मांग के लिए एकजुट हुए थे.’

सलीम ने यह भी सुझाव दिया कि माता-पिता ‘स्टॉकहोम सिंड्रोम’ के शिकार हो सकते हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीड़ित अपने उत्पीड़क के प्रति सहानुभूति विकसित कर लेते हैं.

उन्होंने कहा, ‘हम ही थे जो अदालत गए. तृणमूल कांग्रेस और पुलिस शव को ले जाने की कोशिश कर रहे थे, और हमारे युवा नेताओं मीनाक्षी मुखर्जी, कलातन दासगुप्ता और ध्रुवज्योति साहा ने वाहन को रोका.’

कलातन दासगुप्ता पनिहाटी से सीपीएम उम्मीदवार हैं.

पीड़ित परिवार का फैसला उनके पहले के रुख से अलग

अखबार के अनुसार, माता-पिता का भाजपा की ओर झुकाव उनके जनवरी में दिए गए एक साक्षात्कार से अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ना नहीं चाहते.

पिता ने तब कहा था, ‘जब हमने भाजपा का प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो उन्होंने हमसे दूरी बना ली. हमें भाजपा कार्यालय में एक घंटे तक इंतजार कराया गया, लेकिन कोई मिलने नहीं आया. हमने सब देख लिया है और अब किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं रखना चाहते.’

माता-पिता ने पहले केंद्रीय एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के नतीजों को लेकर भाजपा की भी आलोचना की थी.

सलीम ने कहा, ‘याद रखें, भाजपा नेताओं ने इन असहाय माता-पिता को यह कहकर कोलकाता और दिल्ली के बीच घुमाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री उनसे मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. और यह भी याद रखें कि सीबीआई ने राज्य पुलिस की जांच को ही दोहराया.’

भाजपा के एक सूत्र ने कहा कि आरजी कर घटना के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि आम जनता थे.

उन्होंने कहा, ‘अगर अब उनकी (मां की) उम्मीदवारी भाजपा से आती है, तो इससे आंदोलन की गैर-राजनीतिक छवि कमजोर पड़ सकती है. इसलिए पार्टी अभी भी विचार कर रही है कि यह फैसला सही होगा या नहीं. लेकिन यह सच है कि अगर वह भाजपा के लिए प्रचार करती हैं, तो पार्टी को फायदा होगा.’

टीएमसी का राजनीतिक लाभ का आरोप

तृणमूल कांग्रेस के बैरकपुर इकाई अध्यक्ष पार्थ भौमिक ने माता-पिता पर अपनी बेटी की मौत का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी की पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था और सीबीआई ने उसकी पुष्टि की. अब वह चुनाव लड़ रही हैं.’

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने पहले सीबीआई पर असंतोष जताया था, जिसका मतलब है कि वह भाजपा (केंद्र सरकार) का विरोध कर रही थीं. वे चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि उनका आंदोलन न्याय के लिए था, न कि चुनावी राजनीति के लिए.’