केंद्र सरकार सोशल मीडिया से कंटेंट हटाने की समयसीमा तीन घंटे से घटाकर एक घंटा करने पर विचार कर रही है. आईटी नियम 2026 के तहत पहले ही समयसीमा कम की जा चुकी है. प्रस्तावित बदलाव से ऑनलाइन कंटेंट नियंत्रण और सख्त होने की आशंका जताई जा रही है.

नई दिल्ली: पिछले महीने 10 फरवरी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम 2026 जारी किए थे, जिनमें कंटेंट हटाने की समयसीमा 24 से 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई थी. ये नियम 20 फरवरी से लागू हुए थे, जब नई दिल्ली में एआई इंडिया समिट खत्म हुई थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अब केंद्र सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि क्या इस तीन घंटे की समयसीमा को घटाकर एक घंटा कर दिया जाए. यह सरकार के अंदर इंटरनेट से अधिक सामग्री को तेजी से हटाने की बढ़ती सहमति को दर्शाता है.
इस संबंध में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर अखबार को बताया कि यह विचार-विमर्श अभी शुरुआती चरण में है और सरकार इस पर आगे बढ़ भी सकती है और नहीं भी.
अधिकारी ने कहा, ‘समयसीमा को घटाकर एक घंटा करने का निर्णय लेते समय हाल ही में लागू की गई 2-3 घंटे की समयसीमा के अनुपालन में सोशल मीडिया कंपनियों के रिकॉर्ड की अहम भूमिका होगी.’
उल्लेखनीय है कि फरवरी में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में किए गए संशोधन के सबसे विवादास्पद परिवर्तन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सामग्री को 3 घंटों के भीतर सामग्री हटाने की समयसीमा थी.
इस संबंध में उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना था कि यह नई समयसीमा दुनिया की किसी भी सरकार द्वारा निर्धारित सबसे कम समय सीमा है.
पिछले सप्ताह अखबार ने खबर दी थी कि केंद्र सरकार जल्द ही गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69 (ए) के तहत कई मंत्रालयों को सीधे कंटेंट ब्लॉक करने के आदेश जारी करने की अनुमति दे सकती है. यह शक्ति वर्तमान में केवल सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास है – जो भारत के ऑनलाइन सेंसरशिप तंत्र के बढ़ते दायरे को दर्शाता है.
यह उन उपायों में से एक है जिनके माध्यम से सरकार सोशल मीडिया पर सामग्री को अवरुद्ध करने के अपने प्रयासों को और भी सख्त कर रही है. अन्य प्रयासों में ‘अश्लील’ सामग्री की नई परिभाषा के तहत नए प्रतिबंधित क्षेत्रों को लागू करने की योजना और निश्चित रूप से आईटी अधिनियम की धारा 79 (3)(बी) के तहत एक समानांतर सामग्री अवरोधन तंत्र का विस्तार करना शामिल है, जिसका प्रबंधन गृह मंत्रालय के सहयोग पोर्टल के माध्यम से किया जाता है.
हालांकि, सरकार का कहना है कि वह केवल अवैध सामग्री पर कार्रवाई करती है. लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया है कि सरकार पर व्यंग्य या आलोचना करने वाली उनकी कई पोस्ट, जो जरूरी नहीं कि अवैध हों, कंपनियों द्वारा बढ़ते नियामक दबाव के चलते प्रभावित हुई हैं. न केवल विशिष्ट सामग्री, बल्कि एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वह अकाउंट – जो आमतौर पर सरकार विरोधी सामग्री और टिप्पणियां साझा करते थे – हाल के हफ्तों में ब्लॉक कर दिए गए हैं.
आईटी मंत्रालय ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोध का अखबार को कोई जवाब नहीं दिया.
हालांकि, तकनीकी कंपनियों ने 2-3 घंटे की समय-सीमा पर निजी तौर पर आपत्ति जताई, लेकिन यह समझा जाता है कि सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं.
सरकार ने पहले कहा था कि समय-सीमा को कम कर दिया गया है क्योंकि उन्हें कई हितधारकों से प्रतिक्रिया मिली थी कि पिछली समय-सीमा बहुत लंबी थी और सामग्री के वायरल होने को नहीं रोक पा रही थी.
इस संबंध में एक अधिकारी ने पहले बताया था, ‘तकनीकी कंपनियों के पास निश्चित रूप से गैरकानूनी सामग्री को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से हटाने के तकनीकी साधन हैं.’
सामग्री को शीघ्रता से हटाने की यह अनिवार्यता केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित सामग्री पर ही लागू नहीं होती, बल्कि कानून द्वारा गैरकानूनी मानी जाने वाली व्यापक श्रेणी की सामग्री पर भी लागू होती है.
प्लेटफॉर्म्स को अब बिना सहमति के अश्लील सामग्री को पहले के 24 घंटों के बजाय दो घंटों के भीतर और अन्य प्रकार की गैरकानूनी सामग्री को पहले के 36 घंटों के बजाय तीन घंटों के भीतर हटाना होगा.
इन नियमों पर चिंता जताते हुए फेसबुक, इंस्टाग्राम और वाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी मेटा ने पहले कहा था कि परिचालन की दृष्टि से इन नियमों का पालन करना ‘चुनौतीपूर्ण’ हो सकता है.
मेटा के पॉलिसी उपाध्यक्ष और उप मुख्य गोपनीयता अधिकारी रॉब शेरमैन के अनुसार, सरकार ने नियमों को अधिसूचित करने से पहले उद्योग जगत से परामर्श नहीं किया था.
केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम 2021 में संशोधन पर भी विचार कर रही है, ताकि डिजिटल समाचार आउटलेट्स और वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म पर ‘अश्लील’ वीडियो सामग्री के प्रसार पर रोक लगाई जा सके.
इंडियन एक्सप्रेस ने पहले बताया था कि इस शब्द का दायरा व्यापक हो सकता है और इसमें ऐसी सामग्री को प्रतिबंधित किया जा सकता है जिसमें मानहानिकारक आरोप, ‘अधूरी सच्चाई’, ‘राष्ट्र-विरोधी रवैया’ और देश के ‘सामाजिक, सार्वजनिक और नैतिक जीवन’ के कुछ पहलुओं की ‘आलोचना’ शामिल हो सकती है.