झूठा मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर की 2.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़

भोपाल/मंगल भारत। प्रदेश के कुछ जिलों में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपितों ने संगठित तरीके से गिरोह बनाकर यह काम किया। इसमें फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर बीमा कंपनियों से लगभग 2.50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। पुलिस मुख्यालय की सीआइडी शाखा ने दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। ग्वालियर, मुरैना, रतलाम सहित अन्य जिलों में सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया है। विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि गिरोह के सदस्यों द्वारा विभिन्न बैंकों में फर्जी नामों से सैकड़ों संदिग्ध बैंक खाते खोले गए। इन्हीं खातों के माध्यम से बड़ी संख्या में बीमा पॉलिसियां ली गईं। एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर बीमा कराया गया। साथ ही एक ही नाम-पते वाले व्यक्तियों के अलग-अलग बीमा कंपनियों में बीमा कराए गए। कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आइडी का उपयोग विभिन्न खातों और पॉलिसियों में किया गया। इससे संदेह और अधिक गहरा गया। उल्लेखनीय है कि योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के हितग्राहियों को 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपये का बीमा कवर दिया जाता है। राशि मृत्यु की स्थिति में नामित को दी जाती है। हितग्राही को पता ही नहीं और उसके नाम से जारी हो गई पॉलिसी-जांच में सामने आया है कि अनेक व्यक्तियों की जानकारी के बिना ही उनके नाम से बीमा पॉलिसियां जारी कराई गईं। बीमा कराने के एक माह से एक वर्ष के भीतर ही इन व्यक्तियों का मृत्यु प्रमाण पत्र कथित तौर पर नगरीय निकायों से बनवाया गया, जिसके आधार पर दावा राशि प्राप्त की गई। इस तरह जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर धोखाधड़ी की गई। कई मामलों में बीमित व्यक्ति का निवास स्थान समान दर्ज किया गया, जबकि उसकी मृत्यु किसी अन्य दूरस्थ स्थान पर दर्शाई गई और वहीं से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराए गए।
राजस्थान में पहुंचाई ठगी की राशि
गिरोह ने धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को छिपाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क का उपयोग किया गया। ग्वालियर एवं मुरैना में खोले गए खातों में राशि जमा होते ही उसे रतलाम, राजस्थान के सवाई माधोपुर, गंगानगर एवं अन्य स्थानों के एटीएम से तत्काल निकाल लिया जाता था या म्यूल खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसी प्रकार रतलाम में खोले गए खातों से राशि की निकासी ग्वालियर-मुरैना क्षेत्र के एटीएम से की गई। संदेहास्पद खातों को चिन्हित कर फ्रीज किया गया है। ऐसे कई मामले हैं जिनमें एक ही परिवार के दो या तीन सदस्यों की मृत्यु एक ही सप्ताह या एक माह के भीतर दर्शाकर बीमा दावा प्राप्त किया गया। लगभग सभी मामलों में मृत्यु का कारण प्राकृतिक बताया गया है।