तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले के तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट से टीवीके के आर. श्रीनिवासन सेतुपति ने डीएमके के चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन को केवल एक वोट से हराया. यह राज्य के चुनाव इतिहास में अब तक का सबसे कम अंतर है. इस चुनाव में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतीं, जबकि डीएमके को केवल 59 सीटें ही मिलीं.

नई दिल्ली: तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले के तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट में मुकाबला सिर्फ एक वोट के अंतर से समाप्त हुआ, जो राज्य के चुनाव इतिहास में अब तक का सबसे कम अंतर है.
तमिझगा वेत्री कषगम (टीवीके) के आर. श्रीनिवासन सेतुपति ने द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) के चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन को हराया. वोटों की गिनती का यह सिलसिला देर रात तक चला और काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा.
शुरुआती रुझानों में पेरियाकरुप्पन आगे चल रहे थे. 30 राउंड की गिनती में से पहले राउंड के बाद वह 902 वोटों से आगे थे और दिनभर ज़्यादातर समय तक बढ़त बनाए रखी. 25वें राउंड के आखिर तक उन्हें 77,773 वोट मिले थे, जबकि सेतुपति को 76,646 वोट मिले थे.
स्थिति 26वें चरण में बदली, जब सेतुपति 199 वोटों से आगे निकल गए. इसके बाद उनकी बढ़त लगातार बढ़ती गई – 27वें चरण में 606 वोट, 28वें में 691, 29वें में 788 और 30वें चरण के अंत तक 819 वोट. उस समय सेतुपति को 83,010 और पेरियाकरुप्पन को 82,191 वोट मिले थे.
दिलचस्प बात यह है कि सेतुपति को 365 पोस्टल वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन को 1,183 वोट मिले. जब वोटों की पूरी गिनती खत्म हुई, तो सेतुपति सिर्फ़ एक वोट से जीत गए थे. अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि डीएमके की आपत्तियों के बाद अमान्य वोटों की बार-बार जांच की गई, जिसके बाद देर रात करीब 1:15 बजे विजेता की घोषणा की गई.
आंकड़ों से पता चला कि मतगणना के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच अंतर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा, जो दसवें चरण में 4,902 वोट तक पहुंच गया था, जबकि विभिन्न चरणों में औसत अंतर 2,637 वोट रहा.
रिपोर्ट के अनुसार, आर. पलाकुरिची में 2,012 मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया था. उनका कहना था कि यदि पुलिस थाने की सीमा और मतदान अधिकारों को तिरुप्पत्तूर से पोन्नमरावती स्थानांतरित करने की उनकी मांग पूरी की जाती, तो परिणाम अलग हो सकता था.
इस चुनाव में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतीं, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से कम है, जबकि डीएमके को केवल 59 सीटें ही मिल सकीं.