सीट गंवाने की सजा तय करेगी कांग्रेस

भोपाल/मंगल भारत। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में मुंह के बल शिकस्त खाने के बाद कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति और परिणामों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को हुए नुकसान के बाद प्रदेश संगठन में सर्जरी की तैयारी है और इसकी शुरुआत प्रदेश प्रभारी के स्तर से हो सकती है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की भूमिका को लेकर कांग्रेस हाईकमान गंभीर समीक्षा कर रहा है। राज्यसभा चुनाव के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि पार्टी अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत लगाए, लेकिन नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुई एक गलत कीया के लिए भारी पड़ गई। इस पूरे घटनाक्रम को संगठनात्मक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और उसके बाद संगठनात्मक बदलावों पर फैसला लिया जा सकता है। कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश में प्रदेश प्रभारी बदलना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले दीपक बावरिया और भंवर जितेंद्र सिंह को भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद पद से हटाया जा चुका है।
हरीश को दिग्विजय से मांगनी पड़ी माफी
जिस दिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त हुआ। कांग्रेस ने तत्काल प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। उस प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि लीगल मामलों को लेकर जेपी धनोपिया देख रहे हैं। उन्हें ज्यादा जानकारी है। इस बीच हाथ उठाकर दिग्विजय सिंह को प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी रोकते हुए नजर आए और उन्होंने कहा कि हम सब देख लेंगे। उसके बाद फिर प्रेस कांफ्रेंस शुरू हुई। दिग्विजय सिदाचा गए। इसके बाद प्रभारी हरीश चौधरी दिग्विजय सिंह के बंगले पहुंचे और उन्होंने घटनाक्रम को लेकर माफी भी मांगी।
फिलहाल, जीतू और उमंग रहेंगे सेफ
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इस प्रकरण में कठघरे में हैं। पर उन पर एक्शन नहीं लिया जाएगा। पार्टी के भीतर यह धारणा है कि दोनों नेताओं ने चुनाव के दौरान अपनी जिम्मेदारियां निभाने का प्रयास किया और पूरी स्थिति उनके नियंत्रण में नहीं थी। इस बीच वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की भूमिका को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा हो सकती है। हालांकि उनके करीबी नेताओं का कहना है कि दिग्विजय सिंह ऐसे राजनीतिक प्रयोगों या किसी प्रकार की मिलीभगत की राजनीति के पक्षधर नहीं रहे हैं। 2019 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद भी वे संगठनात्मक सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
कांग्रेस आज से प्रदेशभर में शुरू करेगी चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन
मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग और भाजपा पर हमलावर है। विधानसभा से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय और दिल्ली तक विरोध दर्ज कराने के बाद अब पार्टी ने आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने का निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार 15 जून को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर युवा कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया जाएगा तथा जिला कलेक्टरों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव में उसकी अधिकृत उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन नियमों और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत निरस्त किया गया। पार्टी इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला बता रही है। नामांकन निरस्त होने के बाद से कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। चुनाव आयोग के समक्ष धरना, भाजपा के खिलाफ नारेबाजी और दिल्ली में राष्ट्रपति से मिलने की घोषणा जैसे कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं।
संगठन ने जारी किए निर्देश: मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन प्रभारी महामंत्री डॉ. संजय कामले द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि राज्यसभा चुनाव में हुई कथित बेईमानी और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से पूरे देश में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगा है। पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए मोर्चा संगठनों को जिला स्तर पर भाजपा कार्यालयों का घेराव और पुतला दहन करने के निर्देश दिए गए हैं।