भोपाल एम्स में दिसंबर 2025 में एक कैंसर पीड़ित तीन साल के बच्चे को नर्स ने दवा की जगह फॉर्मेलिन का इंजेक्शन लगाया दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई. यह केमिकल इंसानों के लिए ज़हरीला होता है और इसका इस्तेमाल बायोप्सी सैंपल, टिशू और शरीर को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है. अब पुलिस ने इस मामले में दो नर्सों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.

नई दिल्ली: पुलिस ने शनिवार (13 जून) को बताया कि एम्स भोपाल में दो नर्सों के खिलाफ़ कैंसर से पीड़ित तीन साल के बच्चे को ज़हरीले केमिकल वाला गलत इंजेक्शन देने का मामला दर्ज किया गया है, जिसके तुरंत बाद बच्चे की मौत हो गई.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नर्स ने दवा की जगह उसे फॉर्मेलिन का इंजेक्शन लगाया गया था. यह केमिकल इंसानों के लिए ज़हरीला होता है और इसका इस्तेमाल बायोप्सी सैंपल, टिशू और शरीर को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.
यह घटना दिसंबर 2025 में हुई थी. इस जानलेवा गलती के मामले में अब एक आपराधिक केस दर्ज किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, सार्थक यादव नाम का यह बच्चा सागर ज़िले की बीना तहसील के कौरजा गांव का रहने वाला था. उसे 15 दिसंबर 2025 को गंभीर हालत में एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक वॉर्ड में भर्ती कराया गया था. परिवार का कहना है कि उसका ब्लड कैंसर का इलाज चल रहा था और वह लगातार डॉक्टरों की देखरेख में था.
परिवार का कहना है कि यह जानलेवा चूक 17 दिसंबर की सुबह हुई. बताया गया कि सार्थक की आईवी (IV) लाइन ब्लॉक हो गई थी. ड्यूटी पर मौजूद एक नर्सिंग अधिकारी ने कथित तौर पर वॉर्ड में रखी एक सिरिंज उठा ली, जिस पर ‘F’ लिखा हुआ था, और बिना जांच-पड़ताल के उसमें मौजूद पदार्थ को आईवी बोतल में डाल दिया.
बच्चे के पिता सिद्धार्थ यादव का दावा है कि उन्होंने नर्स को रोकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे. एनडीटीवी ने सिद्धार्थ के हवाले से कहा, ‘मेरे बेटे को कैंसर था और हमने उसे एम्स में भर्ती कराया था. सुबह एक नर्स आई. आईवी लाइन ब्लॉक थी. उसने ‘F’ लिखी हुई सिरिंज उठाई और उसे आईवी बोतल में डाल दिया. मैंने उसे तीन बार रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने कहा, ‘यहां डॉक्टर मैं हूं या तुम?’ इसके कुछ ही देर बाद मेरा बेटा बेहोश हो गया.’
परिवार के अनुसार, इसके बाद वॉर्ड में अफरातफरी मच गई. इंजेक्शन लगने के बाद सार्थक की हालत तेज़ी से बिगड़ने लगी. वह बेहोश हो गया और उसे तुरंत पीआईसीयू ले जाया गया. डॉक्टरों ने सीपीआर दिया, लेकिन तीन साल के बच्चे को बचाया नहीं जा सका. सुबह 8:45 बजे उसकी मौत हो गई.
परिवार का आरोप है कि बच्चे के बेहोश होने के बाद अस्पताल के स्टाफ ने आईवी बोतल हटाने की कोशिश की. सिद्धार्थ ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन बाद में उनसे वह बोतल छीन ली गई. उन्होंने आरोप लगाया, ‘डॉक्टर ने मुझे बताया कि बचने की संभावना सिर्फ़ 50-50% है. जब तक मैं नर्स के पास भागा, उन्होंने मुझसे बोतल ले ली.’
आंतरिक जांच के बाद केस दर्ज
एम्स की आंतरिक जांच में पाया गया कि सार्थक की मौत की सीधी वजह उसे नसों के ज़रिए फॉर्मेलिन देना था. रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ़ को भारी लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया.
रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि बायोप्सी सैंपल के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मेलिन को एक सिरिंज में भरकर वॉर्ड में खुला छोड़ दिया गया था.
नर्सिंग ऑफ़िसर मधुबाला शर्मा पर बच्चे को यह केमिकल देने का आरोप है. एक अन्य नर्सिंग ऑफ़िसर, अनुका गुजराती पर फॉर्मेलिन को सुरक्षित रूप से न रखने का आरोप है.
जांच रिपोर्ट के आधार पर बाग सेवनिया पुलिस ने दोनों नर्सिंग ऑफ़िसरों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.
शर्मा पर गंभीर लापरवाही के कारण मौत का कारण बनने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है. अनुका गुजराती पर खतरनाक केमिकल को लापरवाही से संभालने के लिए धारा 286 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
बागसेवनिया पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अमित सोनी ने कहा, ‘हमने दोनों नर्सों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है और उनकी तलाश कर रहे हैं. एम्स मैनेजमेंट ने दोनों को निलंबित कर दिया है. उनकी जांच में पाया गया कि बच्चे की मौत फॉर्मेलिन के कारण हुई थी.’
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एफआईआर में कहा गया है कि बोन मैरो बायोप्सी के लिए फॉर्मेलिन वाली एक सिरिंज तैयार की गई थी. हालांकि, बाद में यह प्रक्रिया टाल दी गई.
अखबार के अनुसार, इसके बावजूद सिरिंज को न तो फेंका गया और न ही सुरक्षित रखा गया, बल्कि उसे बच्चे के बिस्तर के पास एक लाकर पर छोड़ दिया गया.