मंगल भारत। तृणमूल कांग्रेस के बाद शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट से

उत्साहित मोदी सरकार ने महिला आरक्षण एवं परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए सरकार की ओर से जहां गैरकांग्रेसी दलों से नए सिरे से संपर्क साधा जा रहा है, खासतौर पर द्रमुक को विधेयक में हर राज्य में आनुपातिक आधार पर 50 फीसदी सीटें बढ़ाने संबंधी प्रावधान जोडऩे का आश्वासन दिया गया है। द्रमुक के साथ त्रिभाषा फॉर्मूले पर भी बीच का रास्ता निकालने पर बातचीत हो रही है। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत की बाधा पार कर चुकी सरकार के सामने असली चुनौती लोकसभा की है। वहां द्रमुक के बिना सरकार की बात नहीं बनने वाली। यही कारण है कि उसे मनाने के मोर्चे पर खुद गृह मंत्री अमित शाह जुटे हैं। चूंकि तमिलनाडु चुनाव के नतीजों के बाद द्रमुक ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक से दूरी बना ली है। संबंधित बिल सहित कुछ अन्य सियासी मुद्दों पर द्रमुक के साथ बीच की राह निकाली जा सकती है।