पर्यावरण के साथ जल संरक्षण का संदेश जोड़ते हुए इसे और प्रभावशाली बनाया जा सकता है:

जब शिक्षक का हो संकल्प, तो समाज की दशा और दिशा बदल सकता है
चुरहट/सीधी। पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक पहल ने नया इतिहास रच दिया है। 27 मई 2026 को ग्राम बड़खरा 740 से शुरू हुआ “एक पेड़ मां के नाम” जन-जागरूकता एवं संकल्प अभियान मात्र 24 दिनों में एक लाख लोगों तक पहुंचने में सफल रहा।
इस अभियान की शुरुआत शिक्षक दयाशंकर द्विवेदी द्वारा की गई थी। प्रारंभ में उन्हें भी यह अनुमान नहीं था कि उनका यह छोटा-सा प्रयास इतनी जल्दी एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले लेगा, लेकिन निरंतर मेहनत, जनसहयोग और प्रशासनिक सहभागिता के चलते यह लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया।
अभियान के दौरान प्रमुख रूप से राजीव तिवारी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत रामपुर नैकिन), महेंद्र द्विवेदी (तहसीलदार, रामपुर नैकिन), दिलीप सिंह (विकासखंड अकादमिक समन्वयक), साक्षी गौतम

(तहसीलदार, चुरहट), हंसराज सिंह (तहसीलदार, चुरहट), अवध शरण पांडे (विकासखंड शिक्षा अधिकारी), रामनरेश पटेल (प्राचार्य, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय रीवा), पंकज नाथ मिश्रा (वरिष्ठ आचार्य), दीपक पांडे (विधानसभा प्रोग्रामर निर्वाचन), रमेश चतुर्वेदी (वन मंडल कार्यालय सतना), सतना रेलवे स्टेशन के स्टेशन प्रबंधक ए. मार्टन, रीवा रेलवे स्टेशन प्रबंधन, उत्कृष्ट विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य कृष्ण कुमार तिवारी, वर्तमान प्राचार्य संजय श्रीवास्तव, पटवारा सर्कल की सुषमा रावत सहित अनेक अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत सचिवों, पटवारियों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणजनों तक संकल्प पत्र पहुंचाए गए।

अभियान को सफल बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा विभाग, वन विभाग, रेलवे प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों का उल्लेखनीय योगदान रहा। आयोजकों ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे सामूहिक प्रयासों की सफलता बताया।
विशेष बात यह रही कि दयाशंकर द्विवेदी ने अपने निजी संसाधनों से संकल्प पत्रों की फोटोकॉपी कराकर लोगों तक पहुंचाई, बैनर-पोस्टर लगवाए और स्वयं गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश घर-घर पहुंचाने के साथ-साथ जल संरक्षण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया।
दयाशंकर द्विवेदी का कहना है कि “यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना है, तो केवल पेड़ लगाना ही नहीं बल्कि जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को भी अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। पेड़ और पानी दोनों ही जीवन के आधार हैं।”
अभियान के परिणामस्वरूप एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा हुआ और एक लाख से अधिक लोगों ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संकल्प लिया। अभियान के संयोजकों ने बताया कि यह मुहिम आगे भी निरंतर जारी रहेगी तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाएगा।
वास्तव में, जब शिक्षक का हो संकल्प, तो समाज की दशा और दिशा बदल सकती है। ग्राम बड़खरा 740 से शुरू हुई यह पहल आज पूरे क्षेत्र में पर्यावरण एवं जल संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है और आने वाले समय में और भी बड़े बदलाव की आधारशिला साबित हो सकती है।