बजट सत्र में मिल सकता है विधानसभा उपाध्यक्ष!

दो साल से बिना उपाध्यक्ष के चल रही विधानसभा
-उपाध्यक्ष नहीं होने के कारण विधानसभा की कई समितियों का काम प्रभावित


भोपाल।मप्र
 विधानसभा का बजट सत्र 7 मार्च से शुरू होगा। संभावना जताई जा रही है कि करीब दो साल बाद विधानसभा को नया उपाध्यक्ष मिल सकता है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा संगठन और सरकार इस पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि प्रदेश की सत्ता में वापसी किए शिवराज सरकार को दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन अब तक विधानसभा बिना उपाध्यक्ष के ही चल रही है। यह संभवत: पहला मौका है, जब इतने लंबे समय तक मध्य प्रदेश विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है।
गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले तक मप्र में विधानसभा अध्यक्ष का पद सत्तापक्ष तो विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को मिलता था। लेकिन 2018 में कमलनाथ सरकार बनने के बाद यह परंपरा टूट गई। कांग्रेस ने विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी अपने पास रखा था। ऐसे में भाजपा भी यह ऐलान कर चुकी है कि विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भाजपा के पास ही रहेगा।
उपाध्यक्ष बिना कई काम प्रभावित
प्रदेश में विधानसभा उपाध्यक्ष नहीं होने से विधानसभा का काम प्रभावित हो रहा है। विधानसभा उपाध्यक्ष विस की पत्रकार दीर्घा सलाहकार समिति और विधायनी मंडल के संयोजक होते हैं। वे विधायकों की वेतन भत्ता निर्धारण समिति के सभापति होते हैं। उपाध्यक्ष का पद खाली होने से ये समितियां नहीं बन पा रही हैं। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए विधायक केदार शुक्ला को विधायकों की वेतन भत्ता निर्धारण समिति का सभापति बना दिया है। खास बात यह है कि विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल को हाल में एक साल पूरा हो चुका है पर उपाध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
कांग्रेस ने परंपरा तोड़ बिगाड़ा माहौल
मप्र विधानसभा में परंपरा रही है कि अध्यक्ष का पद सत्ता पक्ष का और उपाध्यक्ष  विपक्ष का होता है, लेकिन कांग्रेस ने यह परंपरा तोड़ दी थी। तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय कांग्रेस के एनपी प्रजापति विस अध्यक्ष थे और हिना कांवरे उपाध्यक्ष थीं। चूंकि विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के दौरान विपक्षी दल भाजपा ने विस अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार उतार दिया था, जबकि कांग्रेस चाहती थी कि विपक्षी दल भाजपा कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन करे। इससे नाराज होकर कांग्रेस ने उपाध्यक्ष का पद भी अपने पास रख लिया था। मार्च, 2020 में जब भाजपा फिर से सत्ता में आई, तो भाजपा विधायक उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को देने के पक्ष में नहीं है। भाजपा अब तक यह तय नहीं कर पा रही है कि उपाध्यक्ष का पद वह अपने पास रखे या विपक्ष को दे। उपाध्यक्ष का पद खाली पड़े होने की यह भी एक वजह मानी जा रही है।
कोरोना के कारण अध्यक्ष का चुनाव भी हुआ था प्रभावित
कोरोना संक्रमण के कारण भी विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कोरोना संक्रमण के कारण शिवराज सरकार के चौथे कार्यकाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा 7 महीने तक विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रहे। शर्मा 20 जुलाई, 2020 से 22 फरवरी 2021 तक प्रोटेम स्पीकर के पद पर  रहे।
उपाध्यक्ष पद के दावेदार
अगर बजट सत्र के दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष का निर्वाचन प्रक्रिया शुरू होती है तो भाजपा के तरफ से कई विधायक दावेदार हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए जिन विधायकों के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है, उनमें केदार शुक्ला, प्रदीप लारिया, यशपाल सिंह सिसोदिया, हरिशंकर खटीक, देवेंद्र वर्मा आदि के नाम शामिल हैं। कमलनाथ सरकार के समय कांग्रेस ने महिला कार्ड खेलते हुए हिना कांवरे को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया था। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि उपाध्यक्ष पद के लिए शिवराज सरकार भी महिला कार्ड खेल सकती है। उपाध्यक्ष के दावेदारों में विधायक नंदिनी मरावी, गायत्री राजे पवार, नीना वर्मा और मालिनी गौड़ के नाम शामिल हैं।
अब तक ये रहे विस उपाध्यक्ष
विष्णु विनायक सरवटे, अनंत सदाशिव पटवर्धन, नरबदा प्रसाद श्रीवास्तव, रामकिशोर शुक्ल, नारायण प्रसाद शुक्ल, सवाई मल जैन, रामचंद्र माहेश्वरी, रामकिशोर शुक्ल, प्यारेलाल कंवर, कन्हैयालाल कंवर, श्रीनिवास तिवारी, भेरूलाल पाटीदार, ईश्वरदास रोहाणी, हजारीलाल रघुवंशी, हरवंश सिंह, राजेंद्र कुमार सिंह और हिना कांवरे।